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    कलावा (मौली) क्यों बांधा जाता है? जानें सही हाथ और नियम

    कलावा बांधने का महत्व, पुरुष-महिला के लिए सही हाथ, और इसे कब उतारना चाहिए

    🕉️ कलावा क्या है?

    कलावा (जिसे मौली भी कहा जाता है) एक पवित्र लाल-पीले रंग का धागा है, जिसे पूजा, हवन या किसी शुभ संकल्प से पहले कलाई पर बांधा जाता है। इसे "रक्षा सूत्र" भी कहा जाता है।

    इसका महत्व क्यों है?

    कलावा बांधना केवल एक धागा बांधना नहीं, बल्कि यह एक संकल्प और सुरक्षा-आशीर्वाद का प्रतीक है। मान्यता है कि पुजारी या पंडित द्वारा मंत्रोच्चार सहित बांधा गया कलावा व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा और अनिष्ट से सुरक्षा प्रदान करता है। यह परंपरा राजा बलि को देवी लक्ष्मी द्वारा रक्षा सूत्र बांधने की पौराणिक कथा से भी जुड़ी है।

    📿 किस हाथ में बांधें?

    पारंपरिक नियम के अनुसार अविवाहित पुरुष और महिलाएं दाहिने हाथ में, जबकि विवाहित महिलाएं बाएं हाथ में कलावा बंधवाती हैं। इसे बांधते समय मुट्ठी बंद रखना और दूसरा हाथ सिर पर रखना पारंपरिक विधि है।

    📅 कब बांधें और कब उतारें?

    पूजा, हवन, नए घर में प्रवेश, यज्ञोपवीत, विवाह जैसे शुभ अवसरों पर कलावा बांधा जाता है। इसे सामान्यतः 21 दिन, मंगलवार या किसी शुभ दिन तक पहनकर, पुराना होने पर पीपल के वृक्ष के नीचे या बहते जल में विसर्जित करने की परंपरा है।

    ✨ लाभ

    कलावा को आत्मविश्वास, सुरक्षा-भाव और संकल्प-शक्ति से जोड़ा जाता है। यह निरंतर स्मरण कराता है कि पहनने वाले ने किसी शुभ कार्य या पूजा का संकल्प लिया है।

    ⚠️ सावधानियां

    कलावा को जानबूझकर काटने या तोड़ने से बचें — इसे स्वाभाविक रूप से घिसकर उतरने देना या शुभ दिन पर सम्मानपूर्वक उतारना उचित माना जाता है।