मुफ़्त जन्म कुंडली
अपनी जन्म तिथि, समय और स्थान से संपूर्ण कुंडली बनाएं — लग्न, नवांश, विंशोत्तरी दशा और दोष जांच सहित।
कुंडली क्या है?
जन्म कुंडली (Janam Kundli) आपके जन्म के ठीक समय पर सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की आकाश में स्थिति का नक्शा है। वैदिक ज्योतिष में इसका उपयोग व्यक्तित्व, जीवन की दिशा और शुभ मुहूर्त जानने के लिए किया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण तीन तत्व हैं — चंद्र राशि (मन व भावनाएं), सूर्य राशि (आत्मा व पहचान), और लग्न (शरीर व बाहरी व्यक्तित्व, जन्म के ठीक समय और स्थान पर निर्भर)।
कुंडली सम्बंधित प्रश्न (FAQ)
लग्न (Ascendant) पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने के कारण हर 2 घंटे में लगभग एक राशि बदलता है। बिना सही समय के लग्न गलत निकलेगा, जबकि सूर्य व चंद्र राशि पर समय का प्रभाव कम होता है (चंद्र राशि दिन में एक बार बदल भी सकती है, इसलिए समय फिर भी उपयोगी है)।
पश्चिमी ज्योतिष में आमतौर पर सूर्य राशि (जन्मतिथि आधारित) प्रचलित है, जबकि वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि (राशिफल, मुहूर्त आदि के लिए) को प्रमुख माना जाता है, क्योंकि चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
यह पूर्णतः निरायण (सिद्ध/Lahiri Ayanamsa) प्रणाली पर आधारित है, जो पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में उपयोग होती है — पश्चिमी सायन प्रणाली से लगभग 24 डिग्री भिन्न।
नवांश हर राशि को नौ बराबर भागों में बाँटकर बनाई गई एक पारंपरिक विभाजित कुंडली (वर्ग चार्ट) है। यह मुख्यतः विवाह और किसी ग्रह के वास्तविक बल के गहरे आकलन के लिए देखी जाती है — मुख्य (D1) कुंडली के साथ मिलाकर पढ़ी जाती है, अकेले नहीं।
काल सर्प दोष तब बनता है जब सभी सात ग्रह राहु-केतु अक्ष के एक ओर हों। साढ़े साती शनि का जन्म चंद्र राशि के आसपास से गुजरने वाला लगभग साढ़े सात वर्ष का पारगमन है। दोनों पारंपरिक अवलोकन हैं, जिन पर ज्योतिषियों में भी मतभेद है — किसी निर्णय से पहले पूरी कुंडली किसी अनुभवी ज्योतिषी को दिखाएँ।
दोनों एक ही जानकारी दिखाते हैं, बस अलग ढंग से। उत्तर भारतीय शैली में भाव 1 (लग्न) की स्थिति स्क्रीन पर स्थिर रहती है और राशि-अंक बदलते हैं। दक्षिण भारतीय शैली में राशियों की स्थिति स्थिर रहती है और लग्न-चिह्न घूमता है — यह क्षेत्रीय पसंद का विषय है, सटीकता का नहीं।