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    दीपावली 2026: तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, पूजा विधि और धनतेरस

    दीपावली 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। दिल्ली के लिए लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, घर पर पूजा विधि, सामग्री, मंत्र, तथा धनतेरस, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की तिथियाँ।

    दीपावली से कुछ दिन पहले ही घर का रंग-ढंग बदलने लगता है। सफ़ाई शुरू हो जाती है, बाज़ारों में दीये और मिठाइयाँ सज जाती हैं, और हर घर में लक्ष्मी माता और गणेश जी की पूजा की तैयारी होने लगती है।

    अगर आप जानना चाहते हैं कि दीपावली 2026 कब है, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त क्या है, घर पर पूजा विधि कैसी हो, धनतेरस, गोवर्धन पूजा और भाई दूज कब हैं — तो यह लेख सब कुछ एक जगह बताता है।

    दीपावली 2026 कब है?

    दीपावली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।

    दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। 2026 में अमावस्या तिथि 8 और 9 नवंबर के बीच फैली हुई है, पर मुख्य दीपावली 8 नवंबर को ही मनाई जाएगी।

    तिथि पूरे भारत में एक ही रहती है, पर लक्ष्मी पूजा का सही मुहूर्त शहर के अनुसार बदलता है, क्योंकि यह स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त और पंचांग गणना पर निर्भर करता है। इसलिए अपने शहर की पूजा का समय तय करने से पहले वहीं का पंचांग देखना बेहतर रहता है, किसी और शहर के लिए छपा समय नहीं।

    एक नज़र में — दीपावली 2026 के पर्व

    पर्वतिथिदिन
    धनतेरस6 नवंबर 2026शुक्रवार
    नरक चतुर्दशी / छोटी दीपावली7 नवंबर 2026शनिवार
    दीपावली / लक्ष्मी पूजा8 नवंबर 2026रविवार
    गोवर्धन पूजा10 नवंबर 2026मंगलवार
    भाई दूज11 नवंबर 2026बुधवार

    कुछ पंचांग और सरकारी अवकाश-सूचियाँ नरक चतुर्दशी और गोवर्धन पूजा की तिथि में एक दिन का अंतर दिखा सकती हैं, क्योंकि तिथि का आरंभ-समाप्ति समय और क्षेत्रीय परंपरा दोनों इसमें भूमिका निभाते हैं। जो व्रत या पूजा आप करना चाहते हैं, उसके लिए अपने स्थानीय पंचांग की तिथि ही अंतिम मानें।

    दीपावली 2026 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त

    नई दिल्ली के लिए प्रकाशित लक्ष्मी पूजा मुहूर्त है:

    रविवार, 8 नवंबर 2026, शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक।

    इसी गणना के अनुसार दिल्ली के लिए प्रदोष काल लगभग शाम 5:31 से रात 8:09 बजे तक बताया गया है।

    यह समय सीधे हर शहर पर लागू नहीं होता। दिल्ली, मुंबई, पुणे, चेन्नई, जयपुर, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहरों में प्रकाशित मुहूर्त एक-दूसरे से अलग होंगे, क्योंकि सूर्यास्त का समय और उससे जुड़ी गणना हर जगह अलग है।

    शहर के अनुसार समय अलग क्यों होता है?

    हिंदू पूजा के मुहूर्त पंचांग के कई कारकों से मिलकर बनते हैं, जिनमें देखने वाले का स्थान भी शामिल है। सूर्यास्त और उससे जुड़े अन्य समय इसी कारण मुहूर्त तय करने में महत्वपूर्ण होते हैं।

    तो अगर आप खोज रहे हैं:

    • दीपावली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2026 दिल्ली
    • दीपावली लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 2026 मुंबई
    • दीपावली पूजा मुहूर्त 2026 बेंगलुरु
    • दीपावली पूजा मुहूर्त 2026 कोलकाता
    • दीपावली पूजा मुहूर्त 2026 पुणे

    तो अपने शहर के लिए बनाया गया पंचांग ही देखें, किसी दूसरे शहर का मुहूर्त कॉपी न करें।

    दीपावली का अर्थ क्या है?

    दीपावली (या दीपोत्सव) का सामान्य अर्थ है दीयों की एक पंक्ति या श्रृंखला।

    दीये जलाना दीपावली की सबसे पहचानी हुई परंपरा है। एक स्तर पर इसे अंधकार पर प्रकाश की, और अज्ञान पर ज्ञान की विजय के उत्सव के रूप में देखा जाता है।

    हिंदू परंपरा में दीपावली का जुड़ाव भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के चौदह वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने से भी माना जाता है। कहा जाता है कि अयोध्या के लोगों ने उनका स्वागत घर-घर दीये जलाकर किया था।

    दीपावली से जुड़ी क्षेत्रीय परंपराएँ भी कई हैं। कहीं देवी लक्ष्मी की पूजा धन और समृद्धि की देवी के रूप में प्रमुख होती है। कुछ क्षेत्रों में यह भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय से भी जुड़ा माना जाता है। पश्चिम बंगाल में इसी समय काली पूजा मनाई जाती है।

    यानी दीपावली भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग ढंग से मनाई जाती है, और यही विविधता इस पर्व को और समृद्ध बनाती है।

    दीपावली पर लक्ष्मी पूजा क्यों की जाती है?

    लक्ष्मी पूजा दीपावली की केंद्रीय परंपराओं में से एक है।

    देवी लक्ष्मी को समृद्धि, धन और शुभता की देवी माना गया है। परिवार पर्व से पहले घर की सफ़ाई और सजावट करते हैं, और शाम को लक्ष्मी पूजा करते हैं।

    देवी लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा भी सामान्यतः की जाती है।

    यह पूजा केवल धन माँगने के बारे में नहीं है। अधिकतर परिवारों के लिए दीपावली की पूजा घर में शांति, समृद्धि, बुद्धि, सौभाग्य और आपसी सद्भाव की प्रार्थना का समय होती है।

    यह बीते साल पर एक नज़र डालने और आने वाले साल में कैसा जीवन बनाना है, इस पर सोचने का भी समय है।

    घर पर लक्ष्मी पूजा कैसे करें — पूजा विधि

    दीपावली की पूजा विधि हर परिवार और परंपरा में थोड़ी अलग होती है, इसलिए कोई एक तरीका ऐसा नहीं है जिसे हर घर अपनाता हो।

    एक सरल लक्ष्मी-गणेश पूजा सामान्यतः इन सामग्रियों से की जा सकती है:

    दीपावली पूजा सामग्री

    • माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र
    • भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र
    • पूजा की चौकी
    • दीये
    • रुई की बत्ती
    • तेल या घी
    • फूल
    • कुमकुम
    • अक्षत (चावल)
    • धूप
    • फल
    • अन्य नैवेद्य (भोग)
    • जल
    • कलश, यदि आपके परिवार में प्रचलित हो
    • सिक्के या अन्य वस्तुएँ जो आपके घर की लक्ष्मी पूजा में परंपरागत रूप से शामिल हों

    पूजा को जटिल बनाने की ज़रूरत नहीं है। सबसे ज़रूरी बात है — स्वच्छता, ध्यान और श्रद्धा के साथ इसे करना।

    सरल लक्ष्मी पूजा के चरण

    1. पूजा स्थान की सफ़ाई

    जहाँ पूजा करनी है, उस जगह को साफ़ करें और मूर्तियों या चित्रों को श्रद्धापूर्वक सजाएँ।

    2. दीपक जलाएँ

    अपने घर की परंपरा के अनुसार दीपक और धूप जलाएँ।

    3. भगवान गणेश की पूजा

    किसी भी शुभ कार्य से पहले जिस तरह गणेश जी की पूजा होती है, उसी तरह यहाँ भी उन्हीं से आरंभ करें।

    4. माता लक्ष्मी की पूजा

    अपने परिवार की परंपरा के अनुसार फूल, कुमकुम, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।

    5. लक्ष्मी मंत्र का जप

    आप लक्ष्मी मंत्र का जप कर सकते हैं, या लक्ष्मी अष्टकम, श्री सूक्तम या अपनी परंपरा की कोई और प्रार्थना पढ़ सकते हैं।

    6. लक्ष्मी आरती

    पूजा को लक्ष्मी आरती के साथ पूर्ण करें।

    आरती में परिवार के सभी सदस्यों को शामिल करें, इसे किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रखें।

    7. प्रसाद वितरण

    मिठाई या अन्य प्रसाद परिवार के सभी सदस्यों में बाँटें।

    शाम का उद्देश्य पूजा को हर तरह से "सही" तरीके से करना नहीं है। एक सरल और सच्चे मन से की गई पूजा भी परिवार की परंपरा बन सकती है।

    लक्ष्मी पूजा के लिए दीपावली मंत्र

    एक प्रचलित मंत्र है:

    ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

    यह पारंपरिक रूप से माता लक्ष्मी की प्रार्थना के रूप में जपा जाता है।

    आप इस मंत्र के जप को अपनी दीपावली पूजा का हिस्सा बना सकते हैं। पूजा के बाद कुछ शांत मिनट नाम-जप में बिता सकते हैं।

    जो लोग एक निश्चित संख्या में जप करना पसंद करते हैं, उनके लिए 108 बार जप की एक माला शांत मन से प्रार्थना में समय बिताने का सरल तरीका है।

    धनतेरस 2026

    इस्तेमाल किए गए दीपावली पंचांग के अनुसार धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।

    धनतेरस का जुड़ाव भगवान धन्वंतरि से माना जाता है। परंपरा में इसे घर की समृद्धि और स्वास्थ्य से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी के लिए शुभ अवसर भी माना जाता है।

    कई परिवार इस दिन खरीदते हैं:

    • सोना या चाँदी
    • बर्तन
    • घरेलू वस्तुएँ
    • दीये
    • अन्य उपयोगी सामान

    यह परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होती है।

    धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है।

    नरक चतुर्दशी और छोटी दीपावली 2026

    नरक चतुर्दशी को सामान्यतः छोटी दीपावली कहा जाता है।

    परंपरा में इसे भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय की कथा से जोड़ा जाता है।

    यह दिन घर की सफ़ाई और मुख्य दीपावली की तैयारी से भी जुड़ा माना जाता है।

    चूँकि तिथि और स्थानीय सूर्योदय की गणना इस पर असर डालती है, नरक चतुर्दशी की पूजा का सही समय जानने के लिए अपना पंचांग ज़रूर देखें।

    दीपावली 2026: गोवर्धन पूजा

    गोवर्धन पूजा दीपावली के बाद मनाई जाती है, और इस साइट के पर्व पंचांग के अनुसार 2026 में यह मंगलवार, 10 नवंबर को है।

    इसका जुड़ाव भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत से है।

    कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने वृंदावनवासियों को इंद्र द्वारा भेजी गई मूसलाधार वर्षा से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाकर उन्हें उसके नीचे शरण दी थी।

    इसलिए यह पर्व कृतज्ञता, भक्ति और मनुष्य, प्रकृति व ईश्वर के आपसी संबंध से गहराई से जुड़ा है।

    घरों में इस दिन अन्नकूट तैयार किया जाता है — विभिन्न प्रकार के शाकाहारी व्यंजनों से बना एक बड़ा भोग।

    कुछ क्षेत्रों और पंचांगों में गोवर्धन पूजा एक दिन आगे-पीछे भी मनाई जाती है, इसलिए अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार ही दिन तय करें।

    भाई दूज 2026

    भाई दूज 2026 बुधवार, 11 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।

    भाई दूज भाई-बहन के स्नेह और रिश्ते का पर्व है।

    परंपरा के अनुसार बहनें भाई को तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु और कल्याण की प्रार्थना करती हैं, और भाई बदले में उपहार व स्नेह देते हैं।

    भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे भाई दूज, भाई फोंटा और भाऊ बीज।

    घर पर दीपावली कैसे मनाएँ

    दीपावली मनाने के लिए महँगा आयोजन ज़रूरी नहीं है।

    एक सार्थक उत्सव बहुत सरल भी हो सकता है।

    घर की सफ़ाई करें। दीपावली से पहले घर साफ़ करना एक जानी-पहचानी परंपरा है। यह उन चीज़ों को हटाने का भी अवसर है जो अब काम की नहीं रहीं, और घर को अधिक शांत बनाने का भी।

    दीये जलाएँ। मिट्टी के दीयों की जो गर्माहट होती है, वह बिजली की लाइटों में नहीं मिलती। घर के अलग-अलग कोनों में सोच-समझकर रखे गए कुछ दीये पूरे घर का माहौल बदल देते हैं।

    रंगोली बनाएँ। द्वार पर एक छोटी रंगोली भी काफ़ी है। किसी बड़ी डिज़ाइन की ज़रूरत नहीं, फूलों या साधारण रंगों से बनी पारंपरिक रंगोली भी उतनी ही सुंदर लगती है।

    परिवार के साथ समय बिताएँ। दीपावली फ़ोन थोड़ी देर के लिए किनारे रखकर साथ बैठने और भोजन साझा करने का अवसर है।

    साथ मिलकर प्रार्थना करें। एक छोटी पारिवारिक प्रार्थना, लक्ष्मी पूजा या आरती वह परंपरा बन सकती है जिसे बच्चे बरसों याद रखते हैं।

    मिठाई बाँटें। परिवार, मित्रों और पड़ोसियों को मिठाई व उपहार देना बहुत लोगों के लिए दीपावली का अभिन्न हिस्सा है।

    ज़िम्मेदारी से उत्सव मनाएँ। पटाखे जलाएँ तो नियमों का पालन करें, और बच्चों, बुज़ुर्गों, पशुओं तथा तेज़ आवाज़ से परेशान होने वाले किसी भी व्यक्ति का ध्यान रखें। शांत दीपावली भी उतनी ही आनंददायक हो सकती है।

    घर के लिए दीपावली सजावट

    घर को उत्सव जैसा दिखाने के लिए बड़ी सजावट ज़रूरी नहीं।

    कुछ सरल विचार:

    • मिट्टी के दीये
    • गेंदे के फूल
    • रंगोली
    • द्वार पर तोरण
    • गर्म रोशनी वाली स्ट्रिंग लाइट
    • पानी में तैरते फूल
    • पीतल के दीपक
    • मोमबत्तियाँ

    एक सरल तरीका यह है कि पूजा स्थान के आस-पास पारंपरिक सजावट रखें, और बाकी घर में रोशनी का इस्तेमाल करें। इससे घर में उत्सव का माहौल बनता है, बिना हर कोने को भरा-भरा दिखाए।

    दफ़्तर या दुकान में दीपावली पूजा

    व्यापारियों के लिए भी दीपावली समृद्धि और नई शुरुआत से जुड़ा पर्व माना जाता है।

    कई व्यापार प्रतिष्ठान इस अवसर पर लक्ष्मी-गणेश पूजा करते हैं, अपने कार्यस्थल की सफ़ाई करते हैं और खातों को व्यवस्थित करते हैं।

    कुछ व्यापारिक समुदायों में इसी समय के आस-पास नए वित्तीय या व्यापारिक वर्ष की शुरुआत से जुड़ी परंपराएँ भी मानी जाती हैं।

    ये रीतियाँ क्षेत्र के अनुसार काफ़ी अलग होती हैं, इसलिए व्यापारी अपने समुदाय और पारिवारिक परंपरा का ही पालन करें।

    दीपावली का भोजन और मिठाइयाँ

    भोजन दीपावली के सबसे प्रिय हिस्सों में से एक है।

    लोकप्रिय मिठाइयाँ और उत्सव के व्यंजन इनमें शामिल हैं:

    • काजू कतली
    • गुलाब जामुन
    • लड्डू
    • जलेबी
    • गुझिया
    • शक्करपारा
    • नमकपारा
    • चकली
    • मठरी
    • बर्फी
    • सूखे मेवे और फल

    अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी खास दीपावली मिठाइयाँ होती हैं।

    कई परिवारों के लिए घर पर मिठाई बनाना उतना ही पर्व का हिस्सा है, जितना उसे खाना।

    दीपावली और आध्यात्मिक साधना

    रोशनी, सजावट और उत्सव दीपावली का एक हिस्सा हैं, पर इस पर्व का एक शांत पक्ष भी है।

    दीपावली खुद से कुछ सरल सवाल पूछने का समय भी हो सकता है:

    मुझे क्या पीछे छोड़ना है?

    कौन-सी आदतें मुझे बदलनी हैं?

    मैं कैसा इंसान बनना चाहता/चाहती हूँ?

    मैं अपने रोज़मर्रा के जीवन में दयालुता कहाँ ला सकता/सकती हूँ?

    कुछ मिनट की प्रार्थना, ध्यान या नाम-जप इस पर्व को और भी व्यक्तिगत बना सकते हैं।

    पूरी शाम एक गतिविधि से दूसरी गतिविधि में बिताने के बजाय, कुछ दस मिनट शांत चिंतन के लिए भी निकाले जा सकते हैं।

    दीपावली पर नाम-जप

    अगर आपका पहले से कोई मंत्र-जप अभ्यास है, तो दीपावली अपने संकल्प को नए सिरे से दोहराने का सार्थक दिन हो सकता है।

    आप चुन सकते हैं:

    108 बार जप

    या

    1 माला

    अपने चुने हुए मंत्र की।

    कुछ लोग दीपावली पर लक्ष्मी मंत्र को प्राथमिकता देते हैं, तो कुछ अपने इष्ट देवता के मंत्र के साथ ही आगे बढ़ते हैं।

    यहाँ अभ्यास को प्रतियोगिता बनाने की कोई ज़रूरत नहीं। इसका मूल्य नियमितता, ध्यान और श्रद्धा में है।

    जप-माला (जप काउंटर) का उपयोग करने वाले हर बार गिनती किए बिना भी अपने रोज़ के अभ्यास का हिसाब रख सकते हैं।

    दीपावली आरती

    आरती दीपावली के उत्सव का एक अहम हिस्सा है।

    लोकप्रिय भक्ति गीतों में शामिल हैं:

    • ॐ जय लक्ष्मी माता
    • गणेश आरती
    • लक्ष्मी आरती
    • गणेश-लक्ष्मी पूजा की प्रार्थनाएँ

    हर परिवार की अपनी पसंदीदा आरती और पूजा का क्रम हो सकता है।

    अगर बच्चे पूजा में शामिल हैं, तो उन्हें आरती में मदद करने या पूजा स्थान तैयार करने देना इस परंपरा को उनके लिए और भी सार्थक बना सकता है।

    दीपावली 2026: एक सरल पूजा सूची

    अगर आप चीज़ों को सरल रखना चाहते हैं, तो यह सूची इस्तेमाल करें:

    पूजा से पहले

    • पूजा स्थान की सफ़ाई करें
    • घर की सफ़ाई करें
    • लक्ष्मी और गणेश जी को स्थापित करें
    • फूल तैयार रखें
    • दीये तैयार रखें
    • मिठाई और फल तैयार रखें
    • धूप और अन्य पूजा सामग्री तैयार रखें
    • रंगोली बनाएँ

    पूजा के दौरान

    • दीपक जलाएँ
    • गणेश जी की पूजा करें
    • लक्ष्मी माता की पूजा करें
    • फूल और प्रसाद अर्पित करें
    • मंत्र का जप करें
    • आरती करें
    • परिवार की भलाई के लिए प्रार्थना करें

    पूजा के बाद

    • प्रसाद बाँटें
    • घर के आस-पास दीये जलाएँ
    • परिवार के साथ समय बिताएँ
    • अपनों से मिलें या फ़ोन करें
    • प्रार्थना या चिंतन के लिए कुछ शांत पल निकालें

    दीपावली 2026 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    दीपावली 2026 में कब है?

    दीपावली रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।

    लक्ष्मी पूजा 2026 में कब है?

    लक्ष्मी पूजा दीपावली के दिन, 8 नवंबर 2026 को की जाती है। नई दिल्ली के लिए प्रकाशित मुहूर्त शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक है। सही मुहूर्त शहर के अनुसार बदलता है।

    धनतेरस 2026 में कब है?

    इस्तेमाल किए गए दीपावली पंचांग के अनुसार धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है।

    छोटी दीपावली 2026 में कब है?

    छोटी दीपावली का जुड़ाव नरक चतुर्दशी से है। सही तिथि तिथि और सूर्योदय की गणना पर निर्भर करती है, इसलिए पूजा के सही समय के लिए अपना स्थानीय पंचांग देखें।

    गोवर्धन पूजा 2026 में कब है?

    गोवर्धन पूजा दीपावली के बाद मनाई जाती है। इस साइट के पर्व पंचांग के अनुसार 2026 में यह मंगलवार, 10 नवंबर को है; कुछ क्षेत्रों और पंचांगों में एक दिन का अंतर भी देखा जा सकता है।

    भाई दूज 2026 में कब है?

    भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।

    धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?

    कई परिवार धनतेरस पर सोना, चाँदी, बर्तन या उपयोगी घरेलू वस्तुएँ खरीदते हैं। यह परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग होती है।

    दीपावली पर किस देवी-देवता की पूजा होती है?

    दीपावली की लक्ष्मी पूजा में मुख्य रूप से देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। अलग-अलग क्षेत्रों में अन्य देवी-देवताओं की परंपराएँ भी प्रचलित हैं।

    दीपावली पर कौन-सा मंत्र जपा जा सकता है?

    एक प्रचलित लक्ष्मी मंत्र है:

    ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

    आप अपने नियमित इष्ट देवता के मंत्र या अपनी पारिवारिक परंपरा की किसी और प्रार्थना के साथ भी जारी रख सकते हैं।

    दीपावली पर दीये क्यों जलाए जाते हैं?

    दीयों को परंपरागत रूप से अंधकार पर प्रकाश की विजय से जोड़ा जाता है। हिंदू परंपरा में दीपक जलाना शुभता, भक्ति और समृद्धि के स्वागत से भी जुड़ा माना जाता है।

    प्रकाश, प्रार्थना और परिवार के साथ दीपावली मनाइए

    दीपावली के साथ बहुत कुछ जुड़ा होता है — खरीदारी, सफ़ाई, खाना बनाना, सजावट और रिश्तेदारों से मिलना-जुलना।

    इन सबके नीचे एक सीधी-सी बात छिपी है: अपने जीवन में प्रकाश लाना।

    एक दीया छोटा होता है। अकेला एक दीया पूरे शहर को रोशन नहीं कर सकता। पर हज़ारों छोटे दीये मिलकर एक रात को बदल देते हैं।

    हमारे जीवन में भी यही सच हो सकता है।

    एक छोटी प्रार्थना।

    कुछ मिनट का नाम-जप।

    एक स्नेह भरा शब्द।

    किसी अकेले व्यक्ति से मिलने जाना।

    परिवार के साथ बाँटा गया भोजन।

    कृतज्ञता का एक क्षण।

    ये छोटी-छोटी बातें भी उसी प्रकाश का हिस्सा हैं, जिसे हम मनाते हैं।

    इस दीपावली, उत्सव के लिए समय निकालिए। साथ ही थोड़ी सी जगह मौन के लिए भी रखिए।

    एक दीया जलाइए।

    अपनी प्रार्थना अर्पित कीजिए।

    अपने प्रियजनों को याद कीजिए।

    शांत मन के साथ नए मौसम का स्वागत कीजिए।

    शुभ दीपावली 2026।