📖 श्रीमद्भगवद्गीता

    भगवद्गीता 700 श्लोकों में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ संवाद है, जो महाभारत युद्ध के आरंभ से ठीक पहले कुरुक्षेत्र के मैदान में हुआ था। यह अर्जुन के कर्तव्य संबंधी मोह के उत्तर में कर्म, भक्ति और आत्मज्ञान का उपदेश प्रस्तुत करती है।

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    अध्याय 1 · 47 श्लोक

    अर्जुन विषाद योग

    अर्जुन का मोह और शोक ही गीता के उपदेश की पृष्ठभूमि बनता है।

    अध्याय 2 · 72 श्लोक

    सांख्य योग

    आत्मा अमर है; कर्म करो, फल की चिंता मत करो।

    अध्याय 3 · 43 श्लोक

    कर्म योग

    निष्क्रियता कोई विकल्प नहीं; निष्काम कर्म व लोकसंग्रह ही श्रेष्ठ मार्ग है।

    अध्याय 4 · 42 श्लोक

    ज्ञान कर्म संन्यास योग

    धर्म की रक्षा हेतु ईश्वर का अवतरण; ज्ञान से कर्मबंधन का नाश संभव है।

    अध्याय 5 · 29 श्लोक

    कर्म संन्यास योग

    संन्यास और कर्मयोग दोनों मोक्ष तक ले जाते हैं; समदृष्टि ही योगी का लक्षण है।

    अध्याय 6 · 47 श्लोक

    आत्मसंयम योग (ध्यान योग)

    अभ्यास व वैराग्य से चंचल मन को वश में किया जा सकता है।

    अध्याय 7 · 30 श्लोक

    ज्ञान विज्ञान योग

    संपूर्ण सृष्टि परमेश्वर से उत्पन्न होकर उन्हीं में स्थित है।

    अध्याय 8 · 28 श्लोक

    अक्षर ब्रह्म योग

    अंतिम समय का स्मरण अगली गति तय करता है; निरंतर भगवद्‌स्मरण आवश्यक है।

    अध्याय 9 · 34 श्लोक

    राज विद्या राज गुह्य योग

    भक्ति सरल है; प्रेमपूर्वक अर्पित की गई छोटी वस्तु भी स्वीकार्य है।

    अध्याय 10 · 42 श्लोक

    विभूति योग

    ईश्वर हर श्रेष्ठ वस्तु में अपनी विभूति के रूप में विद्यमान हैं।

    अध्याय 11 · 55 श्लोक

    विश्वरूप दर्शन योग

    विश्वरूप के दर्शन से ईश्वर की अनंतता व सर्वव्यापकता का बोध होता है।

    अध्याय 12 · 20 श्लोक

    भक्ति योग

    साकार भक्ति सामान्य साधक के लिए सुगम मार्ग है।

    अध्याय 13 · 34 श्लोक

    क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

    शरीर और आत्मा का भेद समझना ही आत्मज्ञान की दिशा में पहला कदम है।

    अध्याय 14 · 27 श्लोक

    गुणत्रय विभाग योग

    सत्व, रज और तम — तीन गुणों से परे जाना ही मुक्ति का मार्ग है।

    अध्याय 15 · 20 श्लोक

    पुरुषोत्तम योग

    संसार-वृक्ष के बंधन को वैराग्य से काटकर पुरुषोत्तम को जानना ही लक्ष्य है।

    अध्याय 16 · 24 श्लोक

    दैवासुर सम्पद विभाग योग

    काम, क्रोध और लोभ — इन तीन द्वारों से बचना आवश्यक है।

    अध्याय 17 · 28 श्लोक

    श्रद्धात्रय विभाग योग

    श्रद्धा भी गुणों के अनुसार तीन प्रकार की होती है।

    अध्याय 18 · 78 श्लोक

    मोक्ष संन्यास योग

    संपूर्ण गीता का सार — स्वधर्म का पालन और पूर्ण शरणागति।

    भगवद्गीता क्या है?

    भगवद्गीता 700 श्लोकों में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ संवाद है, जो महाभारत युद्ध के आरंभ से ठीक पहले कुरुक्षेत्र के मैदान में हुआ था। यह अर्जुन के कर्तव्य संबंधी मोह के उत्तर में कर्म, भक्ति और आत्मज्ञान का उपदेश प्रस्तुत करती है।

    गीता में कितने अध्याय और श्लोक हैं?

    भगवद्गीता में 18 अध्याय और कुल 700 श्लोक हैं।