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अध्याय 5 · 29 श्लोक
कर्म संन्यास योग
कर्मसंन्यासयोग
सारांश
अर्जुन असमंजस में हैं कि संन्यास (कर्म त्याग) श्रेष्ठ है या कर्मयोग। श्रीकृष्ण स्पष्ट करते हैं कि दोनों मार्ग अंततः एक ही लक्ष्य — मोक्ष — तक ले जाते हैं, परंतु फलासक्ति त्यागकर किया गया कर्मयोग व्यावहारिक रूप से सरल है। वे आत्मसंयमी, समदृष्टि योगी की स्थिति का वर्णन करते हैं।
मुख्य शिक्षा
संन्यास और कर्मयोग दोनों मोक्ष तक ले जाते हैं; समदृष्टि ही योगी का लक्षण है।
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अध्याय 5 में कितने श्लोक हैं?
अध्याय 5 ("कर्म संन्यास योग") में 29 श्लोक हैं।
अध्याय 5 का मुख्य विषय क्या है?
संन्यास और कर्मयोग दोनों मोक्ष तक ले जाते हैं; समदृष्टि ही योगी का लक्षण है।