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    अध्याय 6 · 47 श्लोक

    आत्मसंयम योग (ध्यान योग)

    आत्मसंयमयोग / ध्यानयोग

    सारांश

    श्रीकृष्ण ध्यान की विधि का वर्णन करते हैं — उचित आसन, स्थिर मन, संतुलित आहार-विहार और अभ्यास के माध्यम से मन को नियंत्रित करना। वे मन को चंचल किंतु अभ्यास व वैराग्य से वश में करने योग्य बताते हैं, और अधूरे योगाभ्यास से भी अगले जन्म में लाभ मिलने का आश्वासन देते हैं।

    मुख्य शिक्षा

    अभ्यास व वैराग्य से चंचल मन को वश में किया जा सकता है।

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    FAQ

    अध्याय 6 में कितने श्लोक हैं?

    अध्याय 6 ("आत्मसंयम योग (ध्यान योग)") में 47 श्लोक हैं।

    अध्याय 6 का मुख्य विषय क्या है?

    अभ्यास व वैराग्य से चंचल मन को वश में किया जा सकता है।