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अध्याय 16 · 24 श्लोक
दैवासुर सम्पद विभाग योग
दैवासुरसम्पद्विभागयोग
सारांश
श्रीकृष्ण दैवी (सद्गुणी) और आसुरी (दुर्गुणी) प्रकृतियों का विस्तृत वर्णन करते हैं। वे काम, क्रोध और लोभ को नरक के तीन द्वार बताते हुए इनसे बचने की सलाह देते हैं, और शास्त्र-अनुमोदित आचरण के महत्व पर बल देते हैं।
मुख्य शिक्षा
काम, क्रोध और लोभ — इन तीन द्वारों से बचना आवश्यक है।
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अध्याय 16 में कितने श्लोक हैं?
अध्याय 16 ("दैवासुर सम्पद विभाग योग") में 24 श्लोक हैं।
अध्याय 16 का मुख्य विषय क्या है?
काम, क्रोध और लोभ — इन तीन द्वारों से बचना आवश्यक है।