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अध्याय 9 · 34 श्लोक
राज विद्या राज गुह्य योग
राजविद्याराजगुह्ययोग
सारांश
श्रीकृष्ण इस अध्याय को सबसे गोपनीय और श्रेष्ठ ज्ञान बताते हुए समझाते हैं कि वे संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त होकर भी उससे अलिप्त हैं। वे भक्ति की सरलता और सर्वसुलभता पर बल देते हैं — पत्र, पुष्प, फल या जल भी प्रेमपूर्वक अर्पित करने पर स्वीकार्य है।
मुख्य शिक्षा
भक्ति सरल है; प्रेमपूर्वक अर्पित की गई छोटी वस्तु भी स्वीकार्य है।
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अध्याय 9 में कितने श्लोक हैं?
अध्याय 9 ("राज विद्या राज गुह्य योग") में 34 श्लोक हैं।
अध्याय 9 का मुख्य विषय क्या है?
भक्ति सरल है; प्रेमपूर्वक अर्पित की गई छोटी वस्तु भी स्वीकार्य है।