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    अध्याय 10 · 42 श्लोक

    विभूति योग

    विभूतियोग

    सारांश

    श्रीकृष्ण अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन करते हैं — वे हर श्रेष्ठ, शक्तिशाली और सुंदर वस्तु में विद्यमान अपने अंश को उदाहरणों सहित बताते हैं (जैसे देवों में इंद्र, नदियों में गंगा)। यह अध्याय ईश्वर की सर्वव्यापकता को प्रतीकों के माध्यम से स्पष्ट करता है।

    मुख्य शिक्षा

    ईश्वर हर श्रेष्ठ वस्तु में अपनी विभूति के रूप में विद्यमान हैं।

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    FAQ

    अध्याय 10 में कितने श्लोक हैं?

    अध्याय 10 ("विभूति योग") में 42 श्लोक हैं।

    अध्याय 10 का मुख्य विषय क्या है?

    ईश्वर हर श्रेष्ठ वस्तु में अपनी विभूति के रूप में विद्यमान हैं।