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    अध्याय 11 · 55 श्लोक

    विश्वरूप दर्शन योग

    विश्वरूपदर्शनयोग

    सारांश

    अर्जुन की प्रार्थना पर श्रीकृष्ण उन्हें अपना विराट, विश्वरूप दिखाते हैं — जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड, समस्त देवता और समय का प्रवाह समाहित है। यह दृश्य देखकर अर्जुन भयभीत व विस्मित हो जाते हैं, और श्रीकृष्ण फिर अपने सौम्य, चतुर्भुज रूप में लौट आते हैं।

    मुख्य शिक्षा

    विश्वरूप के दर्शन से ईश्वर की अनंतता व सर्वव्यापकता का बोध होता है।

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    FAQ

    अध्याय 11 में कितने श्लोक हैं?

    अध्याय 11 ("विश्वरूप दर्शन योग") में 55 श्लोक हैं।

    अध्याय 11 का मुख्य विषय क्या है?

    विश्वरूप के दर्शन से ईश्वर की अनंतता व सर्वव्यापकता का बोध होता है।