सभी अध्याय

    अध्याय 13 · 34 श्लोक

    क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

    क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग

    सारांश

    श्रीकृष्ण शरीर (क्षेत्र) और आत्मा (क्षेत्रज्ञ) के भेद को समझाते हैं, तथा प्रकृति व पुरुष के अंतर को स्पष्ट करते हैं। वे सच्चे ज्ञान के लक्षणों — विनम्रता, अहिंसा, समता — का वर्णन करते हुए बताते हैं कि इस भेद को जान लेना ही आत्मबोध की दिशा में पहला कदम है।

    मुख्य शिक्षा

    शरीर और आत्मा का भेद समझना ही आत्मज्ञान की दिशा में पहला कदम है।

    श्लोक-दर-श्लोक अनुवाद इस पृष्ठ पर क्रमशः जोड़ा जा रहा है।

    श्री कृष्ण की सभी सामग्री देखें →

    FAQ

    अध्याय 13 में कितने श्लोक हैं?

    अध्याय 13 ("क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग") में 34 श्लोक हैं।

    अध्याय 13 का मुख्य विषय क्या है?

    शरीर और आत्मा का भेद समझना ही आत्मज्ञान की दिशा में पहला कदम है।