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अध्याय 2 · 72 श्लोक
सांख्य योग
सांख्ययोग
सारांश
श्रीकृष्ण अर्जुन के शोक का उत्तर आत्मा की अमरता के ज्ञान से देते हैं — शरीर नाशवान है, पर आत्मा अजर-अमर है। वे निष्काम कर्मयोग की नींव रखते हुए समझाते हैं कि फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। यह अध्याय गीता के सबसे उद्धृत श्लोकों में से एक — कर्म पर अधिकार, फल पर नहीं (श्लोक 47) — के लिए भी जाना जाता है।
मुख्य शिक्षा
आत्मा अमर है; कर्म करो, फल की चिंता मत करो।
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अध्याय 2 में कितने श्लोक हैं?
अध्याय 2 ("सांख्य योग") में 72 श्लोक हैं।
अध्याय 2 का मुख्य विषय क्या है?
आत्मा अमर है; कर्म करो, फल की चिंता मत करो।