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    भारत के प्रसिद्ध देवी मंदिर

    तुलजा भवानी, कनक दुर्गा, मैहर की शारदा देवी, करणी माता और मुंबा देवी सहित भारत के प्रमुख देवी मंदिरों का इतिहास — शक्तिपीठों से अलग।

    भारत में देवी शक्ति के अनगिनत मंदिर हैं। इनमें से 18 महापीठों और अन्य शक्तिपीठों की विस्तृत जानकारी इस साइट के अलग लेख "शक्तिपीठ: संपूर्ण जानकारी" में दी गई है। यह लेख कुछ ऐसे अन्य महत्वपूर्ण देवी मंदिरों को सामने लाता है, जो पारंपरिक शक्तिपीठ सूचियों में नहीं गिने जाते, पर अपनी कथा, इतिहास या भक्ति परंपरा के कारण उतने ही प्रसिद्ध हैं।

    तुलजा भवानी मंदिर, तुलजापुर (महाराष्ट्र)

    तुलजापुर की देवी भवानी को छत्रपति शिवाजी महाराज की कुलदेवी माना जाता है, और कथा के अनुसार देवी ने स्वयं उन्हें एक दिव्य तलवार — "भवानी तलवार" — प्रदान की थी। बालाघाट पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर महाराष्ट्र के "साढ़े तीन शक्तिपीठों" में गिना जाता है (कोल्हापुर की महालक्ष्मी, माहूर की रेणुका, और वणी की सप्तश्रृंगी के "आधे" स्थान के साथ)।

    कनक दुर्गा मंदिर, विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश)

    कृष्णा नदी के किनारे इंद्रकीलाद्रि पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर से जुड़ी परंपरा में कहा जाता है कि यहीं अर्जुन ने शिव से पाशुपतास्त्र प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। यहाँ देवी दुर्गा को महिषासुरमर्दिनी के रूप में पूजा जाता है, और यह आंध्र प्रदेश के सबसे अधिक श्रद्धालुओं वाले शक्ति-मंदिरों में गिना जाता है।

    मैहर की शारदा देवी मंदिर (मध्य प्रदेश)

    त्रिकूट पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 1,063 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, या रोपवे का उपयोग किया जा सकता है। कथा के अनुसार यहाँ सती के हार का एक टुकड़ा गिरा था, जिससे इस नगर का नाम "मैहर" (माई का हार) पड़ा। यह स्थान प्रसिद्ध संगीतज्ञ उस्ताद अलाउद्दीन खान की साधना-भूमि के रूप में भी जाना जाता है, जिन्होंने यहीं देवी की भक्ति से अपनी संगीत-साधना को सिद्ध किया माना जाता है।

    मुंबा देवी मंदिर, मुंबई (महाराष्ट्र)

    मुंबा देवी को स्थानीय कोली मछुआरा समुदाय की कुलदेवी माना जाता है, और मुंबई नगर का नाम स्वयं उन्हीं से — "मुंबा" और "आई" (माता) से — मिलकर बना है। मूल मंदिर वर्तमान CST क्षेत्र के निकट था, जिसे अठारहवीं शताब्दी में वर्तमान भुलेश्वर स्थल पर स्थानांतरित किया गया।

    करणी माता मंदिर, देशनोक (राजस्थान)

    यह मंदिर अपनी विशिष्टता के लिए विश्वप्रसिद्ध है — यहाँ लगभग 25,000 चूहे ("काबा") निवास करते हैं, जिन्हें पवित्र और देवी की संतान माना जाता है, और श्रद्धालु उन्हें दूध व अनाज खिलाते हैं। कथा के अनुसार जब एक भक्त के पुत्र की मृत्यु हुई, तो करणी माता ने यमराज को मनाकर उसे चूहे के रूप में पुनर्जीवित करवाया, और तभी से उनके अनुयायियों के मंदिर में चूहे के रूप में पुनर्जन्म लेने की मान्यता है। वर्तमान भवन बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में महाराजा गंगा सिंह ने बनवाया था।

    अन्य उल्लेखनीय देवी मंदिर

    मनसा देवी मंदिर, पंचकूला (हरियाणा) — शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित इस मंदिर का मुख्य भाग उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में मणिमाजरा के राजा गोपाल सिंह द्वारा बनवाया गया माना जाता है, और परिसर का एक दूसरा मंदिर पटियाला के महाराजा ने बनवाया। इसका प्रबंधन हरियाणा सरकार द्वारा गठित श्री माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड करता है। (ध्यान दें कि हरिद्वार का शक्तिपीठ-सूची वाला मनसा देवी मंदिर इससे अलग है।)

    चंडी देवी मंदिर, हरिद्वार (उत्तराखंड) — शिवालिक पहाड़ियों के पूर्वी शिखर, नीलपर्वत पर स्थित इस मंदिर का वर्तमान भवन 1929 में कश्मीर के शासक सुचत सिंह ने बनवाया, जबकि मुख्य मूर्ति की स्थापना का श्रेय परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को दिया जाता है।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    तुलजा भवानी और छत्रपति शिवाजी का क्या संबंध है?

    तुलजा भवानी को शिवाजी महाराज की कुलदेवी माना जाता है, और कथा के अनुसार देवी ने उन्हें "भवानी तलवार" नामक दिव्य तलवार प्रदान की थी।

    मुंबई शहर का नाम किस देवी से जुड़ा है?

    मुंबा देवी से, जिनके नाम "मुंबा" और "आई" (माता) को मिलाकर "मुंबई" शब्द बना।

    करणी माता मंदिर में चूहों की पूजा क्यों होती है?

    कथा के अनुसार करणी माता ने एक भक्त के मृत पुत्र को चूहे के रूप में पुनर्जीवित करवाया था, और तभी से उनके अनुयायियों के चूहे के रूप में पुनर्जन्म लेने की मान्यता प्रचलित है। मंदिर में लगभग 25,000 चूहे निवास करते हैं।

    मैहर नाम कैसे पड़ा?

    कथा के अनुसार यहाँ देवी सती के हार का एक टुकड़ा गिरा था, जिससे "मैहर" (माई का हार) नाम पड़ा।

    क्या पंचकूला और हरिद्वार की मनसा देवी एक ही हैं?

    नहीं, ये दो अलग-अलग मंदिर हैं। हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर शक्तिपीठ-सूची में गिना जाता है, जबकि पंचकूला (हरियाणा) का मंदिर एक अलग, स्वतंत्र मंदिर है।