लेख

    भारत के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर

    अयोध्या के हनुमान गढ़ी, वाराणसी के संकट मोचन, शिमला के जाखू मंदिर सहित भारत के प्रमुख हनुमान मंदिरों का इतिहास और हनुमान जी के जन्मस्थान को लेकर चला आ रहा विवाद।

    भगवान हनुमान के मंदिर भारत के हर राज्य में मिलते हैं, और इनमें से कुछ अपने इतिहास, स्थापत्य या भक्ति परंपरा के कारण विशेष स्थान रखते हैं।

    हनुमान गढ़ी, अयोध्या (उत्तर प्रदेश)

    अयोध्या के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में गिना जाने वाला हनुमान गढ़ी को लेकर कई कथाएँ प्रचलित हैं। एक लोक-कथा के अनुसार जब संत तुलसीदास को जाति के आधार पर अयोध्या में प्रवेश से रोका गया, तो उन्होंने हनुमान जी से प्रार्थना की और नगर के बाहर ही मंदिर स्थापित करने की अनुमति पाई। ऐतिहासिक रूप से दर्ज है कि औरंगज़ेब के काल में इस स्थान को ध्वस्त कर मस्जिद बनाई गई थी, पर बाद में बैरागी साधुओं ने अवध के नवाब शुजाउद्दौला को पराजित कर उस भूमि पर पुनः हनुमान मंदिर बनवाया। 1855 में अवध के नवाब ने मंदिर के लिए भूमि-राजस्व स्वीकृत किया।

    संकट मोचन हनुमान मंदिर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

    असी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर गोस्वामी तुलसीदास द्वारा सोलहवीं शताब्दी के प्रारंभ में उसी स्थान पर स्थापित किया गया, जहाँ उन्हें हनुमान जी के दर्शन हुए थे। तुलसीदास वही संत हैं जिन्होंने रामचरितमानस और हनुमान चालीसा की रचना की। मंदिर परिसर में एक पीपल का वृक्ष आज भी है, जिसके नीचे बैठकर तुलसीदास ने रामचरितमानस के अधिकांश भाग की रचना की थी। 1900 में पंडित मदन मोहन मालवीय ने मंदिर परिसर का विस्तार करवाया, जिससे इसे वर्तमान स्वरूप मिला।

    जाखू मंदिर, शिमला (हिमाचल प्रदेश)

    शिमला की सबसे ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर अब विश्व की सबसे ऊँची हनुमान प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है — लगभग 33 मीटर (108 फीट) ऊँची यह प्रतिमा 2008 में शुरू होकर 2010 में पूर्ण हुई, और इसे गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया है।

    नमक्कल अंजनेयार मंदिर (तमिलनाडु)

    नमक्कल में स्थित यह मंदिर एक ही चट्टान से तराशी गई लगभग 18 फीट (5.5 मीटर) ऊँची हनुमान प्रतिमा के लिए जाना जाता है, जो भारत की सबसे ऊँची एकाश्म हनुमान मूर्तियों में गिनी जाती है। मंदिर वैखानस परंपरा का अनुसरण करता है, और इसकी उत्पत्ति को लेकर अलग-अलग स्रोतों में पाँचवीं से आठवीं शताब्दी तक की तिथियाँ बताई जाती हैं।

    सालासर बालाजी और मेहंदीपुर बालाजी (राजस्थान)

    सालासर बालाजी मंदिर की मूर्ति की सबसे विशिष्ट पहचान यह है कि यहाँ हनुमान जी को दाढ़ी-मूँछ सहित दर्शाया गया है, जो अधिकतर अन्य हनुमान मंदिरों से इसे अलग करता है। कथा के अनुसार अठारहवीं शताब्दी में एक किसान को खेत जोतते समय यह मूर्ति मिली थी।

    मेहंदीपुर बालाजी मंदिर दौसा ज़िले में स्थित है। यहाँ भी "बालाजी" शब्द हनुमान जी के बाल-रूप के लिए प्रयोग होता है, जो भारत के कई हिस्सों में प्रचलित एक परंपरा है।

    हनुमान जी के जन्मस्थान को लेकर विवाद

    एक ईमानदार तथ्य — हनुमान जी के वास्तविक जन्मस्थान को लेकर आज भी विद्वानों और राज्यों के बीच खुला विवाद है। मुख्य दावेदार हैं: कर्नाटक के कोप्पल ज़िले में तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित अंजनाद्रि पहाड़ी (अनेगुंडी, हम्पी के निकट), महाराष्ट्र के नासिक ज़िले का अंजनेरी, और आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित जापाली तीर्थम, जिसे तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने हाल में जन्मस्थान होने का दावा प्रस्तुत किया। इनके अलावा गुजरात के नवसारी और झारखंड में भी छोटे स्थानीय दावे मिलते हैं। इसका कोई एक सर्वसम्मत ऐतिहासिक उत्तर नहीं है।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    हनुमान गढ़ी की स्थापना किसने की?

    लोक-कथा में इसका श्रेय संत तुलसीदास को दिया जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह भी दर्ज है कि औरंगज़ेब के काल में इसे ध्वस्त किया गया, और बाद में बैरागी साधुओं ने इसे पुनः बनवाया।

    संकट मोचन मंदिर का हनुमान चालीसा से क्या संबंध है?

    इस मंदिर की स्थापना गोस्वामी तुलसीदास ने की, जो हनुमान चालीसा के रचयिता भी हैं।

    विश्व की सबसे ऊँची हनुमान प्रतिमा कहाँ है?

    शिमला के जाखू मंदिर में, जो लगभग 33 मीटर (108 फीट) ऊँची है और गिनीज़ बुक में दर्ज है।

    सालासर बालाजी की मूर्ति अन्य हनुमान मूर्तियों से किस बात में अलग है?

    यहाँ हनुमान जी को दाढ़ी-मूँछ सहित दर्शाया गया है, जो अन्य अधिकतर मंदिरों में नहीं देखा जाता।

    हनुमान जी का जन्मस्थान कहाँ माना जाता है?

    इस पर कोई एक सर्वसम्मत उत्तर नहीं है। कर्नाटक का अंजनाद्रि (हम्पी के निकट), महाराष्ट्र का अंजनेरी (नासिक), और आंध्र प्रदेश के तिरुमला का जापाली तीर्थम — तीनों प्रमुख दावेदार हैं।