लेख

    जप माला से जप कैसे करें? 108 मनके, सुमेरु, उँगली के नियम और माला का चुनाव

    प्रकाशित:

    जप माला से जप कैसे करें? 108 मनकों और सुमेरु का नियम, कौन-सी उँगलियाँ इस्तेमाल करें, तुलसी-रुद्राक्ष जैसी मालाएँ और माला के बिना गिनती का आसान तरीका।

    जप माला में 108 मनके और एक अतिरिक्त बड़ा मनका होता है, जिसे सुमेरु या मेरु कहते हैं। माला का एक पूरा चक्र 108 जप के बराबर माना जाता है। इसके कुछ पारंपरिक नियम हैं, जो माला से जप को व्यवस्थित और एकाग्र बनाते हैं।

    **मुख्य बातें** - एक माला = 108 जप, और सुमेरु मनका शुरुआत व अंत का चिह्न है - माला अँगूठे और मध्यमा (कुछ परंपराओं में अनामिका) से फेरी जाती है, तर्जनी (पहली उँगली) का प्रयोग नहीं होता - सुमेरु तक पहुँचकर माला को लाँघा नहीं जाता, उसे पलटकर वापस घुमाया जाता है - माला का चुनाव इष्ट देवता के अनुसार होता है, जैसे विष्णु-कृष्ण के लिए तुलसी और शिव के लिए रुद्राक्ष

    माला से जप कैसे करें?

    1. 1.शांत स्थान पर स्थिर आसन पर बैठें। परंपरा में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है।
    2. 2.माला को दाहिने हाथ में लें। इसे नाभि से नीचे न लटकने दें।
    3. 3.सुमेरु के ठीक बगल वाले मनके से शुरुआत करें।
    4. 4.अँगूठे और मध्यमा उँगली के बीच हर मनके को खिसकाते हुए एक मंत्र का जप करें।
    5. 5.108 मनके पूरे होकर सुमेरु पर पहुँचने पर एक माला पूरी हुई।
    6. 6.अगली माला के लिए सुमेरु को लाँघें नहीं। माला को हाथ में पलटकर विपरीत दिशा से जप जारी रखें।

    माला फेरते समय उँगली के नियम

    परंपरा में तर्जनी (अँगूठे के पास वाली पहली उँगली) से माला को छूना या फेरना वर्जित माना जाता है। अँगूठा और मध्यमा उँगली इस्तेमाल की जाती है, और कुछ संप्रदायों में अँगूठा और अनामिका। माला फेरते समय माला को दूसरों की नज़र से बचाने के लिए गोमुखी (कपड़े की थैली) का प्रयोग भी परंपरा में है।

    कौन-सी माला किसके लिए?

    मालाआमतौर पर किसके लिए
    तुलसीविष्णु और कृष्ण भक्त, हरे कृष्ण महामंत्र
    रुद्राक्षशिव उपासना, ॐ नमः शिवाय
    चंदनसामान्य जप, विष्णु-कृष्ण
    स्फटिकसामान्य जप, देवी उपासना
    कमलगट्टालक्ष्मी उपासना

    अपने इष्ट के अनुसार माला चुनें। तुलसी माला के बारे में तुलसी माला क्या है और रुद्राक्ष पर रुद्राक्ष का महत्व पढ़ें। माला कैसे धारण करें, यह भी वहीं बताया गया है।

    जप के तीन प्रकार

    परंपरा में जप तीन प्रकार का बताया गया है:

    • वाचिक: ऊँचे स्वर में बोलकर किया गया जप
    • उपांशु: होंठ हिलाकर, धीमे स्वर में, जिसे केवल स्वयं सुन सकें
    • मानसिक: केवल मन में किया गया जप

    अपनी सुविधा और एकाग्रता के अनुसार कोई भी विधि अपनाई जा सकती है।

    108 ही क्यों?

    माला में 108 मनकों के पीछे गणितीय, खगोलीय और योगिक कारण बताए जाते हैं, जिन्हें मंत्र 108 बार ही क्यों जपा जाता है में विस्तार से पढ़ें। कई लोग 27 या 54 मनकों की छोटी माला भी इस्तेमाल करते हैं, जिसके कई चक्र 108 के बराबर होते हैं।

    माला न हो तो गिनती कैसे करें?

    माला हर समय साथ रखना हमेशा संभव नहीं होता। इस साइट का नाम जप काउंटर ऑनलाइन गिनती रखने का आसान तरीका है। रोज़ कितना जप करें, यह जानने के लिए पढ़ें रोज़ कितना नाम जप करें।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    माला में कितने मनके होते हैं?

    जप माला में 108 मनके और एक बड़ा सुमेरु मनका होता है। एक पूरा चक्र 108 जप के बराबर माना जाता है।

    माला किस उँगली से फेरनी चाहिए?

    अँगूठे और मध्यमा उँगली से। कुछ संप्रदायों में अँगूठे और अनामिका से। तर्जनी (पहली उँगली) का प्रयोग परंपरा में वर्जित माना जाता है।

    सुमेरु क्या है और उसे लाँघ क्यों नहीं सकते?

    सुमेरु माला का बड़ा मनका है जो शुरुआत और अंत का चिह्न है। परंपरा में उसे लाँघा नहीं जाता, एक माला पूरी होने पर माला को पलटकर वापस घुमाया जाता है।

    कौन-सी माला किसके लिए है?

    तुलसी की माला विष्णु-कृष्ण के लिए, रुद्राक्ष की शिव के लिए और कमलगट्टे की लक्ष्मी उपासना के लिए आमतौर पर चुनी जाती है।