भारत के सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिर
12 ज्योतिर्लिंगों से आगे — पंच भूत स्थल, बृहदेश्वर, लिंगराज, विरुपाक्ष और अन्य ऐतिहासिक शिव मंदिरों की सूची, इतिहास सहित।
भगवान शिव के मंदिर भारत के हर कोने में मिलते हैं, और इनमें से 12 ज्योतिर्लिंगों को हमने एक अलग विस्तृत लेख में पहले ही कवर किया है। पर शिव भक्ति यहीं समाप्त नहीं होती — भारत में कुछ और ऐसे शिव मंदिर हैं जो अपने इतिहास, स्थापत्य या परंपरा के कारण उतने ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह सूची उन्हीं में से प्रमुख मंदिरों को सामने लाती है।
पंच भूत स्थल — पाँच तत्वों के मंदिर
दक्षिण भारत में शिव के पाँच ऐसे मंदिर हैं जो पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का प्रतिनिधित्व करते हैं:
- एकाम्बरेश्वर मंदिर, कांचीपुरम (तमिलनाडु) — पृथ्वी तत्व। यहाँ शिव को पृथ्वी-लिंग के रूप में पूजा जाता है। इसका विशाल राजगोपुरम दक्षिण भारत के सबसे ऊँचे गोपुरमों में गिना जाता है।
- जंबुकेश्वर मंदिर, तिरुवनईकवल (तमिलनाडु) — जल तत्व। यहाँ गर्भगृह का शिवलिंग हमेशा भूमिगत झरने के पानी में डूबा रहता है, चाहे बाहर सूखा ही क्यों न हो।
- अन्नामलाईयार मंदिर, तिरुवन्नामलई (तमिलनाडु) — अग्नि तत्व। अरुणाचल पहाड़ी की तलहटी में स्थित यह भारत के सबसे बड़े मंदिर परिसरों में गिना जाता है, और संत रमण महर्षि के आश्रम से भी जुड़ा है।
- श्रीकालहस्ती मंदिर, आंध्र प्रदेश — वायु तत्व। स्वर्णमुखी नदी के तट पर स्थित इस मंदिर का नाम एक मकड़ी (श्री), सर्प (काल) और हाथी (हस्ति) की भक्ति-कथा से जुड़ा है।
- तिल्लई नटराज मंदिर, चिदंबरम (तमिलनाडु) — आकाश तत्व। यहाँ शिव को भौतिक मूर्ति के बजाय एक अदृश्य, निराकार रूप में पूजा जाता है, जिसे "चिदंबर रहस्य" कहा जाता है।
अन्य ऐतिहासिक व स्थापत्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण शिव मंदिर
बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर (तमिलनाडु) — चोल सम्राट राजराज प्रथम द्वारा लगभग 1010 ईस्वी में बनवाया गया यह मंदिर पूरी तरह ग्रेनाइट से बना है, जबकि निकटतम ग्रेनाइट स्रोत लगभग 60 किमी दूर बताया जाता है। इसका विमान लगभग 66 मीटर ऊँचा है, जिसके शिखर पर लगभग 80 टन वज़नी एक ही पत्थर का कलश स्थापित है।
मीनाक्षी अम्मन मंदिर, मदुरई (तमिलनाडु) — यहाँ देवी मीनाक्षी और भगवान सुंदरेश्वर (शिव) दोनों की पूजा होती है। वर्तमान भव्य संरचना मुख्यतः सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में नायक शासकों, विशेषकर तिरुमलाई नायक के काल में विकसित हुई। मंदिर में 14 गोपुरम हैं, जिनमें सबसे ऊँचा दक्षिणी गोपुरम लगभग 52 मीटर का है।
लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर (ओडिशा) — वर्तमान संरचना लगभग ग्यारहवीं शताब्दी में सोमवंशी और बाद में गंग वंश के शासकों द्वारा बनवाई गई, हालाँकि यहाँ पूजा इससे कहीं पुरानी मानी जाती है। यहाँ शिव और विष्णु को संयुक्त रूप से "हरिहर" के रूप में पूजा जाता है।
विरुपाक्ष मंदिर, हम्पी (कर्नाटक) — इसका मूल भाग सामान्यतः सातवीं शताब्दी का माना जाता है, और विजयनगर साम्राज्य के दौरान इसका बड़ा विस्तार हुआ। हम्पी के अन्य खंडहरों के विपरीत, 1565 में विजयनगर साम्राज्य के पतन के बाद भी यहाँ पूजा निरंतर जारी रही।
कपालेश्वर मंदिर, मायलापुर, चेन्नई (तमिलनाडु) — चेन्नई के सबसे पुराने बसे हुए इलाकों में से एक में स्थित यह मंदिर अपने वर्तमान रूप में लगभग सोलहवीं शताब्दी का है (मूल मंदिर को पुर्तगाली आक्रमण के दौरान क्षति पहुँची थी)। इसका लगभग 40 मीटर ऊँचा गोपुरम चेन्नई की पहचान है।
वडक्कुनाथन मंदिर, त्रिशूर (केरल) — त्रिशूर के केंद्र में एक टीले पर स्थित यह मंदिर केरल की पारंपरिक मंदिर-स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है, और इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया है।
गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर (कर्नाटक) — कथा के अनुसार रावण द्वारा लाए गए आत्मलिंग को गणेश जी की चतुराई से यहीं भूमि में स्थिर कर दिया गया था, जिसके बाद इसे हिलाना असंभव हो गया — इसी से "महाबलेश्वर" नाम पड़ा।
मुरुडेश्वर मंदिर (कर्नाटक) — अरब सागर से तीन ओर से घिरी एक छोटी पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान शिव की लगभग 37 मीटर ऊँची प्रतिमा है, जिसे 2000 के दशक की शुरुआत में स्थापित किया गया था।
नीलकंठ महादेव मंदिर, पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड) — ऋषिकेश से लगभग 32 किमी दूर घने जंगल में स्थित यह मंदिर नर-नारायण पर्वत श्रृंखला से घिरा है, और इसकी स्थापत्य शैली में द्रविड़ प्रभाव देखा जाता है, जो इस क्षेत्र के लिए असामान्य है।
अमरनाथ गुफा मंदिर (जम्मू-कश्मीर) — हिमालय में लगभग 3,888 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस गुफा में एक प्राकृतिक हिम-लिंग बनता है, जो चंद्र-चक्र के अनुसार घटता-बढ़ता है। यात्रा पहलगाम या बालटाल मार्ग से की जाती है।
12 ज्योतिर्लिंग — शिव के सर्वोच्च तीर्थ
सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, महाकालेश्वर सहित सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का विस्तृत विवरण इस साइट के अलग लेख "ज्योतिर्लिंग: 12 ज्योतिर्लिंगों की संपूर्ण जानकारी" में उपलब्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पंच भूत स्थल क्या हैं?
दक्षिण भारत के पाँच शिव मंदिर, जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं: कांचीपुरम (पृथ्वी), तिरुवनईकवल (जल), तिरुवन्नामलई (अग्नि), श्रीकालहस्ती (वायु) और चिदंबरम (आकाश)।
भारत का सबसे ऊँचा शिव मंदिर टॉवर कौन-सा है?
बृहदेश्वर मंदिर (तंजावुर) का विमान लगभग 66 मीटर ऊँचा है, और अन्नामलाईयार मंदिर (तिरुवन्नामलई) का राजगोपुरम भी लगभग इतना ही ऊँचा है — दोनों भारत के सबसे ऊँचे मंदिर-टावरों में गिने जाते हैं।
क्या ज्योतिर्लिंग और पंच भूत स्थल एक ही हैं?
नहीं। ज्योतिर्लिंग शिव पुराण में वर्णित 12 विशेष स्थल हैं, जबकि पंच भूत स्थल पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाले पाँच अलग दक्षिण भारतीय मंदिर हैं। दोनों सूचियाँ अलग-अलग हैं और आपस में मेल नहीं खातीं।
अमरनाथ यात्रा किस मार्ग से की जाती है?
पहलगाम या बालटाल — इन दो पारंपरिक मार्गों में से किसी एक से।