अर्थ
हे स्वामी अय्यप्पा, मैं आपकी शरण में हूँ। "शरणम्" का अर्थ है शरण।
परिचय
सबरीमला जाने वाले यात्री इकतालीस दिन का व्रत रखते हैं, जिसे मंडल व्रत कहते हैं। इस दौरान वे काले या नीले कपड़े पहनते हैं, सादा भोजन करते हैं और एक-दूसरे को भी "स्वामी" कहकर बुलाते हैं, क्योंकि माना जाता है कि हर यात्री में अय्यप्पा हैं। सिर पर इरुमुडि की पोटली लेकर पहाड़ चढ़ते हुए यह पुकार लगातार चलती रहती है।
जप कैसे करें
यात्रा में मिलकर, ऊँची आवाज़ में। व्रत के दिनों में सुबह-शाम इसे बोलने की परंपरा है।
कब जपें: मंडल काल (नवंबर से जनवरी) और सबरीमला यात्रा के दौरान।
अभी जप शुरू करें
जप काउंटर इसी मंत्र के साथ खुलेगा और आपकी गिनती रखेगा।
लोग अक्सर पूछते हैं
मंडल व्रत के दौरान हर यात्री को अय्यप्पा का रूप माना जाता है। इसलिए कोई किसी को नाम से नहीं, "स्वामी" कहकर बुलाता है।