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    प्रसिद्ध मंदिर

    श्री अमरनाथ गुफा मंदिर

    हिमालय, अनंतनाग जिला, जम्मू और कश्मीर

    प्राकृतिक रूप से बनने-घटने वाले हिम-लिंग के लिए प्रसिद्ध, भारत की सबसे दुर्गम वार्षिक यात्राओं में से एक

    एक नज़र में

    स्थान
    हिमालय, अनंतनाग जिला, जम्मू और कश्मीर
    आराध्य
    भगवान शिव (हिम-लिंग स्वरूप में)
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    शैव
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    जम्मू तवी रेलवे स्टेशन (यात्रा का आरंभिक बिंदु; वहाँ से पहलगाम लगभग 235 किमी या बालटाल लगभग 330 किमी सड़क मार्ग से)
    निकटतम हवाई अड्डा
    श्रीनगर हवाई अड्डा (यात्रा शिविरों के निकटतम)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    जुलाई से अगस्त (आधिकारिक यात्रा अवधि के दौरान)।

    इतिहास

    अमरनाथ गुफा समुद्रतल से लगभग 3,888 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जहाँ प्राकृतिक रूप से एक हिम-लिंग बनता है, जिसका आकार चंद्रमा की कलाओं के साथ घटता-बढ़ता रहता है। कथा के अनुसार भगवान शिव ने यहीं माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी, जिससे इस गुफा का नाम "अमरनाथ" पड़ा। यात्रा परंपरागत रूप से पहलगाम या बालटाल मार्ग से की जाती है।

    धार्मिक महत्व

    अमरनाथ यात्रा भारत की सबसे शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण तीर्थ यात्राओं में गिनी जाती है, जिसके लिए श्रद्धालुओं को पंजीकरण के साथ-साथ स्वास्थ्य प्रमाणपत्र भी अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होता है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    यात्रा केवल जून/जुलाई से अगस्त (श्रावण मास) के मध्य एक निर्धारित अवधि हेतु खुलती है।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    जम्मू से सड़क मार्ग द्वारा श्रीनगर होते हुए पहलगाम या बालटाल तक पहुँचकर, वहाँ से पैदल, खच्चर या हेलीकॉप्टर द्वारा गुफा तक पहुँचा जाता है। यात्रा हेतु ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य है।

    भगवान शिव की भक्ति आगे बढ़ाएँ

    इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।

    सामान्य प्रश्न

    हाँ, श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) की आधिकारिक वेबसाइट से पूर्व पंजीकरण व स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य है, बिना इसके यात्रा की अनुमति नहीं दी जाती।