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    प्रसिद्ध मंदिर

    मीनाक्षी अम्मन मंदिर

    मदुरै, तमिलनाडु

    हजारों नक्काशीदार मूर्तियों वाले 14 भव्य गोपुरम् का शहर

    एक नज़र में

    स्थान
    मदुरै, तमिलनाडु
    आराध्य
    माता मीनाक्षी (पार्वती) व भगवान सुंदरेश्वर (शिव)
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    शैव
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    मदुरै जंक्शन (लगभग 2 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    मदुरै अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 12 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से मार्च; चित्तिराई उत्सव (अप्रैल-मई) मीनाक्षी व सुंदरेश्वर के दिव्य विवाह का भव्य उत्सव है।

    इतिहास

    मीनाक्षी अम्मन मंदिर दक्षिण भारत की द्रविड़ स्थापत्य कला का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। मंदिर की उत्पत्ति प्राचीन मानी जाती है, जबकि वर्तमान भव्य संरचना मुख्यतः 16वीं-17वीं शताब्दी में नायक शासकों, विशेषतः तिरुमलाई नायक द्वारा विकसित हुई। मंदिर में 14 गोपुरम् हैं, जिनमें से सबसे ऊँचा दक्षिणी गोपुरम् लगभग 52 मीटर ऊँचा है, जिस पर हजारों रंगीन मूर्तियाँ उकेरी गई हैं।

    धार्मिक महत्व

    यह मंदिर मदुरै नगर के सांस्कृतिक व वास्तुशिल्पीय हृदय के रूप में जाना जाता है, और देवी मीनाक्षी को यहाँ शिव से पहले प्रधान देवता के रूप में पूजा जाना इसे भारत के दुर्लभ मंदिरों में से एक बनाता है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    प्रातः 5:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे और सायं 4:00 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक (दो पालियों में)।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    मदुरै जंक्शन चेन्नई, बेंगलुरु व अन्य प्रमुख दक्षिण भारतीय शहरों से जुड़ा है; स्टेशन से मंदिर तक ऑटो व टैक्सी सुगमता से उपलब्ध हैं।

    भगवान शिव की भक्ति आगे बढ़ाएँ

    इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।

    सामान्य प्रश्न

    मंदिर परिसर में कुल 14 गोपुरम् हैं, जिनमें सबसे ऊँचा दक्षिणी गोपुरम् लगभग 52 मीटर ऊँचा है और हजारों रंगीन मूर्तियों से सुसज्जित है।