ज्योतिर्लिंग
रामनाथस्वामी (रामेश्वरम) ज्योतिर्लिंग
रामेश्वरम द्वीप, तमिलनाडु
जहाँ स्वयं भगवान राम ने शिवलिंग की स्थापना की — चार धाम व द्वादश ज्योतिर्लिंग दोनों का संगम
एक नज़र में
- स्थान
- रामेश्वरम द्वीप, तमिलनाडु
- आराध्य
- भगवान शिव (रामनाथ रूप में)
- श्रेणी
- ज्योतिर्लिंग
- परंपरा
- शैव
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- रामेश्वरम रेलवे स्टेशन (मंदिर से लगभग 2 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- मदुरै अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 170 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- अक्टूबर से अप्रैल (गर्मियों में तटीय उमस अधिक रहती है)।
इतिहास
रामेश्वरम मंदिर भारत के सुदूर दक्षिण में, एक द्वीप पर स्थित है जो पंबन पुल द्वारा मुख्य भूमि से जुड़ा है। रामायण के अनुसार लंका पर आक्रमण से पूर्व भगवान राम ने ब्रह्महत्या (रावण वध) के दोष से मुक्ति हेतु यहाँ शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी — माता सीता ने स्वयं रेत से एक लिंग बनाया, जिसे "रामलिंगम" कहा जाता है, जबकि हनुमान द्वारा कैलाश से लाए गए लिंग को "विश्वलिंगम" कहते हैं; दोनों की आज भी संयुक्त पूजा होती है। वर्तमान भव्य मंदिर मुख्यतः 12वीं से 17वीं शताब्दी के मध्य पांड्य, चोल व सेतुपति शासकों द्वारा निर्मित हुआ और अपने विश्व-प्रसिद्ध, सबसे लंबे मंदिर गलियारे (कॉरिडोर) के लिए जाना जाता है।
धार्मिक महत्व
रामेश्वरम एक साथ चार धाम यात्रा का एक धाम (दक्षिण) और बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक भी है — यह दोहरा गौरव पाने वाला भारत का एकमात्र तीर्थ है। यहाँ स्नान हेतु 22 पवित्र कुंड (तीर्थ) हैं, जिनमें स्नान की परंपरा है।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
प्रातः 5:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे और सायं 3:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक (दो पालियों में)।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
रामेश्वरम रेलवे स्टेशन चेन्नई, मदुरै व अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा है और प्रसिद्ध पंबन रेल पुल पार करते हुए द्वीप पर पहुँचता है। मदुरै से सड़क मार्ग द्वारा भी लगभग 4-5 घंटे में रामेश्वरम पहुँचा जा सकता है।
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