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    ज्योतिर्लिंग

    मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

    श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश

    कृष्णा नदी की घाटी में बसा शिव-शक्ति का दुर्लभ संगम

    एक नज़र में

    स्थान
    श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश
    आराध्य
    भगवान शिव व माता पार्वती (मल्लिका व अर्जुन रूप में)
    श्रेणी
    ज्योतिर्लिंग
    परंपरा
    शैव
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    मार्कापुर रोड रेलवे स्टेशन (लगभग 85 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, हैदराबाद (लगभग 220 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    सितंबर से फरवरी; महाशिवरात्रि पर यहाँ विशाल ब्रह्मोत्सवम् मनाया जाता है।

    इतिहास

    श्रीशैलम में स्थित मल्लिकार्जुन मंदिर एक ही समय पर ज्योतिर्लिंग (शिव) और शक्तिपीठ (देवी भ्रामराम्बा) दोनों माना जाता है — भारत के बहुत कम तीर्थों में यह दुर्लभ संयोग पाया जाता है। कथा के अनुसार गणेश जी के प्रथम विवाह से रुष्ट होकर कार्तिकेय क्रौंच पर्वत चले गए थे; उन्हें मनाने शिव-पार्वती स्वयं यहाँ पहुँचे और मल्लिकार्जुन (मल्लिका अर्थात पार्वती, अर्जुन अर्थात शिव के रूप) में सदा के लिए विराजमान हो गए। मंदिर की वर्तमान संरचना मुख्यतः विजयनगर साम्राज्य के काल में विकसित हुई।

    धार्मिक महत्व

    श्रीशैलम को "दक्षिण का कैलाश" भी कहा जाता है। यह भारत के उन गिने-चुने स्थलों में से एक है जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही परिसर में स्थित हैं, जिससे यह शैव और शाक्त दोनों परंपराओं के भक्तों के लिए समान रूप से पूज्य है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    प्रातः 4:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक, बीच में कुछ पूजा-विराम अवधि के साथ।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    मार्कापुर रोड स्टेशन मुंबई, बंगलौर व हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से जुड़ा है; वहाँ से बस या टैक्सी द्वारा लगभग 2 घंटे में श्रीशैलम पहुँचा जा सकता है। हैदराबाद और कुर्नूल से राज्य परिवहन की सीधी बसें भी उपलब्ध हैं।

    भगवान शिव की भक्ति आगे बढ़ाएँ

    इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।

    सामान्य प्रश्न

    मल्लिकार्जुन के रूप में यहाँ शिव ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं, और उसी परिसर में देवी भ्रामराम्बा शक्तिपीठ के रूप में पूजी जाती हैं — यह भारत के बहुत कम मंदिरों में से एक है जहाँ दोनों परंपराएं एक साथ मिलती हैं।