ज्योतिर्लिंग
मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
कृष्णा नदी की घाटी में बसा शिव-शक्ति का दुर्लभ संगम
श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश
इतिहास
श्रीशैलम में स्थित मल्लिकार्जुन मंदिर एक ही समय पर ज्योतिर्लिंग (शिव) और शक्तिपीठ (देवी भ्रामराम्बा) दोनों माना जाता है — भारत के बहुत कम तीर्थों में यह दुर्लभ संयोग पाया जाता है। कथा के अनुसार गणेश जी के प्रथम विवाह से रुष्ट होकर कार्तिकेय क्रौंच पर्वत चले गए थे; उन्हें मनाने शिव-पार्वती स्वयं यहाँ पहुँचे और मल्लिकार्जुन (मल्लिका अर्थात पार्वती, अर्जुन अर्थात शिव के रूप) में सदा के लिए विराजमान हो गए। मंदिर की वर्तमान संरचना मुख्यतः विजयनगर साम्राज्य के काल में विकसित हुई।
महत्व
श्रीशैलम को "दक्षिण का कैलाश" भी कहा जाता है। यह भारत के उन गिने-चुने स्थलों में से एक है जहाँ ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही परिसर में स्थित हैं, जिससे यह शैव और शाक्त दोनों परंपराओं के भक्तों के लिए समान रूप से पूज्य है।
निकटतम रेलवे स्टेशन
मार्कापुर रोड रेलवे स्टेशन (लगभग 85 किमी)
निकटतम हवाई अड्डा
राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, हैदराबाद (लगभग 220 किमी)
दर्शन समय
प्रातः 4:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक, बीच में कुछ पूजा-विराम अवधि के साथ।
सर्वोत्तम समय
सितंबर से फरवरी; महाशिवरात्रि पर यहाँ विशाल ब्रह्मोत्सवम् मनाया जाता है।
कैसे पहुँचें
मार्कापुर रोड स्टेशन मुंबई, बंगलौर व हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से जुड़ा है; वहाँ से बस या टैक्सी द्वारा लगभग 2 घंटे में श्रीशैलम पहुँचा जा सकता है। हैदराबाद और कुर्नूल से राज्य परिवहन की सीधी बसें भी उपलब्ध हैं।
नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।