ज्योतिर्लिंग
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
हिमालय की गोद में स्थित सबसे दुर्गम ज्योतिर्लिंग, पंच केदार व चार धाम का भाग
रुद्रप्रयाग जिला, हिमालय, उत्तराखंड
इतिहास
केदारनाथ समुद्रतल से लगभग 3,583 मीटर की ऊँचाई पर मंदाकिनी नदी के उद्गम के निकट स्थित है। महाभारत कथा के अनुसार पांडवों ने कुरुक्षेत्र युद्ध में हुई हिंसा के प्रायश्चित हेतु शिव को खोजा; शिव बैल रूप धारण कर भूमि में समा गए, और उनका पृष्ठभाग (कूबड़) यहाँ पूजा जाता है — शेष अंग "पंच केदार" के अन्य चार मंदिरों में प्रकट हुए। वर्तमान मंदिर लगभग 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्स्थापित माना जाता है। 2013 की भीषण बाढ़ में आस-पास का क्षेत्र अत्यंत क्षतिग्रस्त हुआ, किंतु मुख्य मंदिर सुरक्षित रहा।
महत्व
केदारनाथ चार धाम यात्रा का एक अभिन्न अंग है और बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे दुर्गम भी। मंदिर तक पहुँचने के लिए गौरीकुंड से लगभग 16-18 किमी की पैदल या खच्चर/हेलीकॉप्टर यात्रा करनी पड़ती है, जो इसे शारीरिक व आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से एक चुनौतीपूर्ण तीर्थ बनाती है।
निकटतम रेलवे स्टेशन
कोई सीधा रेलवे स्टेशन नहीं; निकटतम रेलहेड ऋषिकेश (लगभग 216 किमी), वहाँ से सड़क मार्ग व पैदल यात्रा
निकटतम हवाई अड्डा
जॉलीग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून (लगभग 239 किमी); केदारनाथ हेलीपैड तक सीधी हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध
दर्शन समय
कपाट खुलने की अवधि में प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक (शीतकाल में मंदिर बर्फबारी के कारण बंद रहता है और मूर्ति ऊखीमठ लाई जाती है)।
सर्वोत्तम समय
मई से जून और सितंबर से अक्टूबर (मानसून व अत्यधिक ठंड से बचने हेतु)।
कैसे पहुँचें
ऋषिकेश या हरिद्वार से सड़क मार्ग द्वारा गौरीकुंड/सोनप्रयाग तक (लगभग 200+ किमी) पहुँचकर, वहाँ से 16-18 किमी की पैदल यात्रा, खच्चर, पालकी या हेलीकॉप्टर सेवा द्वारा केदारनाथ पहुँचा जाता है। मंदिर केवल अप्रैल/मई से नवंबर तक (कपाट खुलने की अवधि) ही दर्शन हेतु खुला रहता है।
नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।