ज्योतिर्लिंग
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
प्रथम ज्योतिर्लिंग — जो बार-बार टूटा और हर बार फिर उठा
वेरावल, सौराष्ट्र, गुजरात
इतिहास
सोमनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है और अरब सागर के तट पर, वेरावल के निकट प्रभास पाटन में स्थित है। पौराणिक कथा के अनुसार चंद्रदेव (सोम) ने दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति पाने हेतु यहाँ शिव की आराधना की थी, इसीलिए इसे "सोमनाथ" (सोम अर्थात चंद्रमा के स्वामी) कहा जाता है। ऐतिहासिक रूप से यह मंदिर अत्यंत समृद्ध रहा है और इसे कम से कम छह बार विध्वंस का सामना करना पड़ा — सबसे प्रसिद्ध आक्रमण 1024 ई. में महमूद ग़ज़नवी द्वारा हुआ था। स्वतंत्रता के पश्चात् सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रेरणा से वर्तमान भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया गया, जिसका उद्घाटन 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने किया।
महत्व
सोमनाथ को केवल ज्योतिर्लिंग ही नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक अजेयता का प्रतीक भी माना जाता है — "जितनी बार गिराया गया, उतनी ही बार खड़ा हुआ"। मंदिर समुद्र के ठीक किनारे स्थित है और यहाँ से अंटार्कटिका तक कोई भूमि-बाधा नहीं है, ऐसा एक शिलालेख मंदिर परिसर में अंकित है।
निकटतम रेलवे स्टेशन
सोमनाथ रेलवे स्टेशन (मंदिर से लगभग 1.5 किमी); बड़े जंक्शन के लिए वेरावल जंक्शन (लगभग 7 किमी)
निकटतम हवाई अड्डा
दीव हवाई अड्डा (लगभग 63 किमी) या राजकोट हवाई अड्डा (लगभग 200 किमी)
दर्शन समय
प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 9:30 बजे तक; प्रतिदिन तीन आरतियाँ (प्रातः 7:00, मध्याह्न 12:00, सायं 7:00) और रात्रि में लाइट एंड साउंड शो होता है।
सर्वोत्तम समय
नवंबर से फरवरी (सर्दियों का मौसम, समुद्र तटीय गर्मी से राहत); कार्तिक पूर्णिमा व महाशिवरात्रि पर विशेष उत्सव होता है।
कैसे पहुँचें
सोमनाथ रेलवे स्टेशन सीधे अहमदाबाद व अन्य गुजरात शहरों से जुड़ा है। वेरावल जंक्शन से लंबी दूरी की अधिक ट्रेनें मिलती हैं। सड़क मार्ग से यह द्वारका (लगभग 240 किमी) और अहमदाबाद (लगभग 400 किमी) से बस व टैक्सी द्वारा जुड़ा है।
नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।