मंदिर सूची

    प्रसिद्ध मंदिर

    श्री बद्रीनाथ धाम

    चार धाम व छोटा चार धाम दोनों में सम्मिलित, नर-नारायण पर्वतों के मध्य बसा उत्तर का धाम

    चमोली जिला, हिमालय, उत्तराखंड

    इतिहास

    बद्रीनाथ अलकनंदा नदी के तट पर, नर व नारायण पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित है और आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार धामों में उत्तर दिशा का प्रतिनिधित्व करता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहाँ बदरी (बेर) वृक्षों के नीचे तपस्या की थी, इसीलिए इसका नाम "बद्रीनाथ" पड़ा। यह उत्तराखंड के "छोटा चार धाम" (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ) यात्रा क्रम का भी अंतिम पड़ाव है।

    महत्व

    बद्रीनाथ के निकट ही "माना गाँव" स्थित है, जिसे भारत का अंतिम गाँव कहा जाता है, तथा व्यास गुफा व भीम पुल जैसे पौराणिक महत्व के स्थल भी यहीं से जुड़े हैं।

    निकटतम रेलवे स्टेशन

    कोई सीधा रेलवे स्टेशन नहीं; निकटतम रेलहेड ऋषिकेश (लगभग 295 किमी) या हरिद्वार, वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा

    निकटतम हवाई अड्डा

    जॉलीग्रांट हवाई अड्डा, देहरादून (लगभग 317 किमी)

    दर्शन समय

    कपाट खुलने की अवधि में प्रातः 4:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक (शीतकाल में बर्फबारी के कारण मंदिर बंद रहता है)।

    सर्वोत्तम समय

    मई से जून और सितंबर से अक्टूबर।

    कैसे पहुँचें

    ऋषिकेश या हरिद्वार से सड़क मार्ग द्वारा जोशीमठ होते हुए बद्रीनाथ तक पहुँचा जा सकता है, यात्रा में सामान्यतः 10-12 घंटे लगते हैं। मंदिर केवल अप्रैल/मई से नवंबर (कपाट खुलने की अवधि) तक ही दर्शन हेतु खुला रहता है।

    नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।

    FAQ

    सड़क मार्ग से बद्रीनाथ व केदारनाथ (गौरीकुंड) के बीच लगभग 220-235 किमी की दूरी है, और कई श्रद्धालु एक ही यात्रा में दोनों धामों के दर्शन करते हैं।