प्रसिद्ध मंदिर
महाबलेश्वर मंदिर, गोकर्ण
गोकर्ण, उत्तर कन्नड़ जिला, कर्नाटक
'दक्षिण की काशी' — जहाँ रावण द्वारा लाया गया आत्मलिंग सदा के लिए भूमि में समा गया
एक नज़र में
- स्थान
- गोकर्ण, उत्तर कन्नड़ जिला, कर्नाटक
- आराध्य
- भगवान शिव (महाबलेश्वर, आत्मलिंग स्वरूप में)
- श्रेणी
- प्रसिद्ध मंदिर
- परंपरा
- शैव
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- गोकर्ण रोड रेलवे स्टेशन (लगभग 10 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- डाबोलिम हवाई अड्डा, गोवा (लगभग 145 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- अक्टूबर से मार्च; महाशिवरात्रि पर विशेष भव्य उत्सव मनाया जाता है।
इतिहास
गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर की कथा रावण से जुड़ी है — उसने शिव से आत्मलिंग प्राप्त कर उसे लंका ले जाने का प्रयास किया, किंतु गणेश जी की चतुराई से लिंग गोकर्ण की भूमि में स्थिर हो गया, जिसे उखाड़ना असंभव हो गया। तभी से इसे "महाबलेश्वर" (महान बल वाला) कहा जाता है। मंदिर अरब सागर के निकट स्थित है और अपने प्राचीन द्रविड़ स्थापत्य के लिए जाना जाता है।
धार्मिक महत्व
गोकर्ण को दक्षिण भारत की काशी माना जाता है और यहाँ के समुद्र तट अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी विश्वप्रसिद्ध हैं, जिससे यह तीर्थ आध्यात्मिक व पर्यटन दोनों दृष्टि से लोकप्रिय है।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
प्रातः 6:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे और सायं 4:00 बजे से रात्रि 8:30 बजे तक (दो पालियों में)।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
गोकर्ण रोड स्टेशन कोंकण रेलवे मार्ग पर स्थित है और मुंबई, गोवा व मैंगलोर से जुड़ा है; स्टेशन से मंदिर तक ऑटो द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
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