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    प्रसिद्ध मंदिर

    कोणार्क सूर्य मंदिर

    कोणार्क, ओडिशा

    सूर्य देव के विशाल रथ के रूप में निर्मित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल

    एक नज़र में

    स्थान
    कोणार्क, ओडिशा
    आराध्य
    भगवान सूर्य (सूर्य देव)
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    अन्य परंपरा
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    पुरी रेलवे स्टेशन (लगभग 30-35 किमी); भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन (लगभग 65 किमी, अधिक ट्रेनें)
    निकटतम हवाई अड्डा
    बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर (लगभग 65 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से मार्च; कोणार्क नृत्य उत्सव (दिसंबर) एक प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजन है।

    इतिहास

    कोणार्क सूर्य मंदिर का निर्माण लगभग 1250 ई. में गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा करवाया गया था। मंदिर की संरचना भगवान सूर्य के विशाल रथ के रूप में डिज़ाइन की गई है, जिसमें 12 जोड़ी पत्थर के पहिए (प्रत्येक लगभग 3 मीटर व्यास का, वर्ष के 12 महीनों का प्रतीक) व सात घोड़े (सप्ताह के सात दिनों के प्रतीक) उकेरे गए हैं। यह भारत की सबसे उत्कृष्ट कला-स्थापत्य कृतियों में गिना जाता है।

    धार्मिक महत्व

    मुख्य मंदिर संरचना आज आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त अवस्था में है, फिर भी इसकी बारीक नक्काशी व खगोलीय परिशुद्धता इसे 1984 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किए जाने का आधार बनी।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक (यह एक संरक्षित स्मारक है, नियमित पूजा-अर्चना यहाँ नहीं होती)।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    पुरी या भुवनेश्वर से टैक्सी व बस द्वारा कोणार्क आसानी से पहुँचा जा सकता है; कई श्रद्धालु पुरी के जगन्नाथ मंदिर व कोणार्क को एक ही यात्रा में शामिल करते हैं।

    सूर्य देव की भक्ति आगे बढ़ाएँ

    इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।

    सामान्य प्रश्न

    नहीं, कोणार्क सूर्य मंदिर वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित एक ऐतिहासिक स्मारक है, न कि सक्रिय पूजा स्थल।