प्रसिद्ध मंदिर
लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर
'मंदिरों के शहर' भुवनेश्वर का सबसे भव्य व प्राचीन मंदिर, कलिंग स्थापत्य का शिखर
भुवनेश्वर, ओडिशा
इतिहास
लिंगराज मंदिर की वर्तमान संरचना लगभग 11वीं शताब्दी में सोमवंशी व गंग वंश के शासकों द्वारा निर्मित करवाई गई, यद्यपि मंदिर परिसर की पूजा-परंपरा कहीं अधिक प्राचीन मानी जाती है। यहाँ भगवान शिव व विष्णु की संयुक्त पूजा "हरिहर" रूप में होती है, जो भुवनेश्वर के प्राचीन नाम "एकाम्र क्षेत्र" से भी जुड़ा है। मंदिर का शिखर लगभग 55 मीटर ऊँचा है।
महत्व
भुवनेश्वर को कभी "मंदिरों का शहर" कहा जाता था, जहाँ अनुमानतः हजारों मंदिर हुआ करते थे; लिंगराज आज भी उस विरासत का सर्वोच्च व सबसे सक्रिय जीवंत उदाहरण है।
निकटतम रेलवे स्टेशन
भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन (लगभग 4 किमी); लिंगराज मंदिर रोड रेलवे स्टेशन (छोटा, निकट)
निकटतम हवाई अड्डा
बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर (लगभग 8 किमी)
दर्शन समय
प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक (गैर-हिंदुओं का गर्भगृह में प्रवेश वर्जित है, बाहरी दर्शन मंच उपलब्ध)।
सर्वोत्तम समय
अक्टूबर से फरवरी; शिवरात्रि मेला विशेष रूप से भव्य आयोजन है।
कैसे पहुँचें
भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन कोलकाता, दिल्ली व चेन्नई सहित कई शहरों से जुड़ा है; स्टेशन से मंदिर तक ऑटो व टैक्सी सुगमता से उपलब्ध हैं।
नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।