प्रसिद्ध मंदिर
लिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर
भुवनेश्वर, ओडिशा
'मंदिरों के शहर' भुवनेश्वर के सबसे प्राचीन और भव्य मंदिरों में से एक, कलिंग स्थापत्य का शिखर
एक नज़र में
- स्थान
- भुवनेश्वर, ओडिशा
- आराध्य
- भगवान हरिहर (शिव-विष्णु संयुक्त स्वरूप, त्रिभुवनेश्वर)
- श्रेणी
- प्रसिद्ध मंदिर
- परंपरा
- शैव
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन (लगभग 4 किमी); लिंगराज मंदिर रोड रेलवे स्टेशन (छोटा, निकट)
- निकटतम हवाई अड्डा
- बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर (लगभग 8 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- अक्टूबर से फरवरी; शिवरात्रि मेला विशेष रूप से भव्य आयोजन है।
इतिहास
लिंगराज मंदिर की वर्तमान संरचना लगभग 11वीं शताब्दी में सोमवंशी व गंग वंश के शासकों द्वारा निर्मित करवाई गई, यद्यपि मंदिर परिसर की पूजा-परंपरा कहीं अधिक प्राचीन मानी जाती है। यहाँ भगवान शिव व विष्णु की संयुक्त पूजा "हरिहर" रूप में होती है, जो भुवनेश्वर के प्राचीन नाम "एकाम्र क्षेत्र" से भी जुड़ा है। मंदिर का शिखर लगभग 55 मीटर ऊँचा है।
धार्मिक महत्व
भुवनेश्वर को कभी "मंदिरों का शहर" कहा जाता था, जहाँ अनुमानतः हजारों मंदिर हुआ करते थे; लिंगराज आज भी उस विरासत का सर्वोच्च व सबसे सक्रिय जीवंत उदाहरण है।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक (गैर-हिंदुओं का गर्भगृह में प्रवेश वर्जित है, बाहरी दर्शन मंच उपलब्ध)।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन कोलकाता, दिल्ली व चेन्नई सहित कई शहरों से जुड़ा है; स्टेशन से मंदिर तक ऑटो व टैक्सी सुगमता से उपलब्ध हैं।
भगवान शिव की भक्ति आगे बढ़ाएँ
इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।