प्रसिद्ध मंदिर
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर
तिरुवनंतपुरम, केरल
विश्व के सबसे धनी मंदिरों में से एक, त्रावणकोर राजघराने से गहरा संबंध
एक नज़र में
- स्थान
- तिरुवनंतपुरम, केरल
- आराध्य
- भगवान पद्मनाभस्वामी (विष्णु, शेषशायी रूप में)
- श्रेणी
- प्रसिद्ध मंदिर
- परंपरा
- वैष्णव
- निकटतम रेलवे स्टेशन
- तिरुवनंतपुरम सेंट्रल रेलवे स्टेशन (लगभग 1-2 किमी)
- निकटतम हवाई अड्डा
- तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 8 किमी)
- घूमने का सर्वोत्तम समय
- नवंबर से फरवरी; अलपशी व पंगुनी उत्सव (मार्च-अप्रैल) विशेष रूप से भव्य हैं।
इतिहास
पद्मनाभस्वामी मंदिर की उत्पत्ति अत्यंत प्राचीन मानी जाती है, जबकि वर्तमान भव्य द्रविड़ शैली की संरचना मुख्यतः 18वीं शताब्दी में त्रावणकोर के महाराजा मार्तंड वर्मा द्वारा विकसित हुई, जिन्होंने अपना संपूर्ण राज्य प्रतीकात्मक रूप से भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया था। 2011 में मंदिर के तहखानों में मिले अरबों रुपये के खजाने ने इसे विश्वभर में सुर्खियों में ला दिया।
धार्मिक महत्व
मंदिर प्रबंधन आज भी त्रावणकोर राजपरिवार से जुड़ा है, और यहाँ प्रवेश हेतु कड़े पारंपरिक वस्त्र-संहिता व आचार-नियमों का पालन आवश्यक है।
यात्रा की योजना
दर्शन समय
प्रातः 3:30 बजे से रात्रि 7:20 बजे तक (कई चरणों में, पारंपरिक वस्त्र-संहिता अनिवार्य)।
त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।
तिरुवनंतपुरम सेंट्रल स्टेशन दक्षिण भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा है; स्टेशन से मंदिर तक ऑटो व पैदल दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।
भगवान विष्णु की भक्ति आगे बढ़ाएँ
इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।