मंदिर सूची

    प्रसिद्ध मंदिर

    उडुपी श्री कृष्ण मठ

    जहाँ भक्त खिड़की से भगवान कृष्ण के दर्शन करते हैं — संत मध्वाचार्य द्वारा स्थापित मठ

    उडुपी, कर्नाटक

    इतिहास

    उडुपी कृष्ण मठ की स्थापना 13वीं शताब्दी में द्वैत वेदांत के प्रणेता संत मध्वाचार्य ने की थी। मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा "कनकन कैंडी" (कनक की खिड़की) है — कथा के अनुसार संत कनकदास को जाति के आधार पर मंदिर में प्रवेश से रोका गया था, तब भगवान कृष्ण स्वयं मुड़कर पीछे की खिड़की से उन्हें दर्शन देने लगे, और आज भी भक्त इसी खिड़की से मूर्ति के दर्शन करते हैं।

    महत्व

    उडुपी अपने अद्वितीय शाकाहारी व्यंजनों की परंपरा हेतु भी विश्वप्रसिद्ध है, और यहाँ की "उडुपी शैली" रसोई भारत के अनेक रेस्तराओं की पहचान बन चुकी है।

    निकटतम रेलवे स्टेशन

    उडुपी रेलवे स्टेशन (लगभग 3-3.2 किमी)

    निकटतम हवाई अड्डा

    मैंगलोर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 58 किमी)

    दर्शन समय

    प्रातः 5:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक (कई दैनिक पूजा सत्रों के साथ)।

    सर्वोत्तम समय

    अक्टूबर से फरवरी; जन्माष्टमी व पर्यय उत्सव (हर दो वर्ष में मठाधीश परिवर्तन समारोह) विशेष रूप से भव्य हैं।

    कैसे पहुँचें

    उडुपी रेलवे स्टेशन कोंकण रेलवे मार्ग पर स्थित है और मुंबई, गोवा व मैंगलोर से जुड़ा है; स्टेशन से मंदिर तक ऑटो व टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

    नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।

    FAQ

    यह मंदिर की पिछली दीवार में स्थित एक छोटी खिड़की है, जिसके माध्यम से भक्त कृष्ण की मूर्ति के दर्शन करते हैं — संत कनकदास से जुड़ी कथा की स्मृति में यह परंपरा आज भी जीवित है।