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    प्रसिद्ध मंदिर

    उडुपी श्री कृष्ण मठ

    उडुपी, कर्नाटक

    जहाँ भक्त खिड़की से भगवान कृष्ण के दर्शन करते हैं — संत मध्वाचार्य द्वारा स्थापित मठ

    एक नज़र में

    स्थान
    उडुपी, कर्नाटक
    आराध्य
    भगवान बाल कृष्ण
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    वैष्णव
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    उडुपी रेलवे स्टेशन (लगभग 3-3.2 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    मैंगलोर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 58 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से फरवरी; जन्माष्टमी व पर्यय उत्सव (हर दो वर्ष में मठाधीश परिवर्तन समारोह) विशेष रूप से भव्य हैं।

    इतिहास

    उडुपी कृष्ण मठ की स्थापना 13वीं शताब्दी में द्वैत वेदांत के प्रणेता संत मध्वाचार्य ने की थी। मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा "कनकन कैंडी" (कनक की खिड़की) है — कथा के अनुसार संत कनकदास को जाति के आधार पर मंदिर में प्रवेश से रोका गया था, तब भगवान कृष्ण स्वयं मुड़कर पीछे की खिड़की से उन्हें दर्शन देने लगे, और आज भी भक्त इसी खिड़की से मूर्ति के दर्शन करते हैं।

    धार्मिक महत्व

    उडुपी अपने अद्वितीय शाकाहारी व्यंजनों की परंपरा हेतु भी विश्वप्रसिद्ध है, और यहाँ की "उडुपी शैली" रसोई भारत के अनेक रेस्तराओं की पहचान बन चुकी है।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    प्रातः 5:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक (कई दैनिक पूजा सत्रों के साथ)।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    उडुपी रेलवे स्टेशन कोंकण रेलवे मार्ग पर स्थित है और मुंबई, गोवा व मैंगलोर से जुड़ा है; स्टेशन से मंदिर तक ऑटो व टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

    श्री कृष्ण की भक्ति आगे बढ़ाएँ

    इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।

    सामान्य प्रश्न

    यह मंदिर की पिछली दीवार में स्थित एक छोटी खिड़की है, जिसके माध्यम से भक्त कृष्ण की मूर्ति के दर्शन करते हैं — संत कनकदास से जुड़ी कथा की स्मृति में यह परंपरा आज भी जीवित है।