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    चौघड़िया क्या है? अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल चौघड़िया का मतलब

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    चौघड़िया क्या होता है और कैसे देखें? दिन-रात के आठ-आठ भाग, सात चौघड़ियों के नाम, स्वामी ग्रह, शुभ-अशुभ का अंतर और हर वार की पहली चौघड़िया।

    चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ बराबर भागों में बाँटकर शुभ और अशुभ समय देखने की पद्धति है। हर भाग लगभग डेढ़ घंटे का होता है (12 घंटे के दिन में लगभग 90 मिनट)। यह पद्धति विशेषकर गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में काम-काज और यात्रा का समय तय करने के लिए बहुत प्रचलित है।

    **मुख्य बातें** - सात चौघड़िया हैं: उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ और रोग - **अमृत, शुभ और लाभ** अच्छी मानी जाती हैं, **चर** मिली-जुली (यात्रा के लिए ठीक), और **उद्वेग, रोग और काल** से बचने की परंपरा है - हर वार की पहली चौघड़िया उस वार के स्वामी ग्रह की होती है - विवाह जैसे बड़े शुभ कार्यों के लिए केवल चौघड़िया नहीं, पूरा मुहूर्त देखा जाता है

    चौघड़िया कैसे निकलती है?

    सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है, और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात को भी 8 भागों में। हर भाग एक चौघड़िया है। चूँकि सूर्योदय और सूर्यास्त रोज़ और शहर के अनुसार बदलते हैं, इसलिए चौघड़िया का समय भी रोज़ और हर शहर में अलग होता है। अपने शहर की आज की चौघड़िया पंचांग पेज पर देखें।

    सात चौघड़िया और उनका स्वरूप

    चौघड़ियास्वामी ग्रहस्वरूप
    अमृतचंद्रमाशुभ, सभी अच्छे कार्यों के लिए
    शुभगुरु (बृहस्पति)शुभ, मांगलिक कार्यों के लिए
    लाभबुधशुभ, व्यापार और लेन-देन के लिए
    चर (चल)शुक्रमिली-जुली, यात्रा के लिए ठीक
    उद्वेगसूर्यअशुभ, नए कार्य से बचें
    रोगमंगलअशुभ, नए कार्य से बचें
    कालशनिअशुभ, नए कार्य से बचें

    हर वार की पहली चौघड़िया

    दिन की पहली चौघड़िया उस वार के स्वामी ग्रह की होती है। उसके बाद बाकी चौघड़िया एक निश्चित क्रम में चलती हैं।

    वारदिन की पहली चौघड़िया
    रविवारउद्वेग
    सोमवारअमृत
    मंगलवाररोग
    बुधवारलाभ
    गुरुवारशुभ
    शुक्रवारचर
    शनिवारकाल

    रविवार को क्रम है: उद्वेग, चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग, फिर उद्वेग। अन्य वारों में क्रम इसी चक्र में उसी वार की पहली चौघड़िया से शुरू होता है।

    चौघड़िया का उपयोग कैसे करें?

    • कोई छोटा काम, जैसे खरीदारी, भुगतान या यात्रा की शुरुआत, तय करना हो तो अमृत, शुभ या लाभ चौघड़िया चुनी जाती है।
    • उद्वेग, रोग और काल में नए काम की शुरुआत से बचने की परंपरा है।
    • चौघड़िया पंचांग का केवल एक अंग है। बड़े कार्यों के लिए राहुकाल और तिथि भी देखी जाती है। राहुकाल के बारे में यहाँ पढ़ें और तिथि के बारे में यहाँ।

    पंचांग के अन्य अंग

    चौघड़िया के साथ तिथि, नक्षत्र, योग और करण मिलकर पूरा पंचांग बनाते हैं। विस्तार से पंचांग क्या है में पढ़ें।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    चौघड़िया क्या होती है?

    चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ बराबर भागों में बाँटकर शुभ-अशुभ समय देखने की पद्धति है। हर भाग लगभग डेढ़ घंटे का होता है।

    कौन-सी चौघड़िया शुभ मानी जाती है?

    अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया अच्छी मानी जाती हैं। चर मिली-जुली है और यात्रा के लिए ठीक मानी जाती है। उद्वेग, रोग और काल से नए काम की शुरुआत में बचने की परंपरा है।

    हर वार की पहली चौघड़िया कौन-सी होती है?

    रविवार को उद्वेग, सोमवार को अमृत, मंगलवार को रोग, बुधवार को लाभ, गुरुवार को शुभ, शुक्रवार को चर और शनिवार को काल।

    क्या चौघड़िया हर शहर में एक-सी होती है?

    नहीं। यह सूर्योदय-सूर्यास्त से निकलती है, जो रोज़ और शहर के अनुसार बदलते हैं, इसलिए समय हर शहर में अलग होता है।