आज की तिथि कैसे देखें? तिथि क्या होती है, कैसे बनती है और क्षय-वृद्धि तिथि का मतलब
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आज की तिथि कैसे देखें और तिथि क्या होती है? चंद्रमा-सूर्य के 12 अंश से बनने वाली तिथि, उदय तिथि का नियम, क्षय और वृद्धि तिथि, और पक्ष की पहचान सरल भाषा में।
तिथि हिंदू पंचांग की चंद्र दिन की इकाई है, और आज की तिथि जानने का सबसे भरोसेमंद तरीका अपने शहर का पंचांग देखना है। तिथि का नाम (जैसे पंचमी या एकादशी) और पक्ष (शुक्ल या कृष्ण) मिलकर बताते हैं कि आज चंद्र मास का कौन-सा दिन है। यह लेख बताता है कि तिथि कैसे बनती है, उसे कैसे पढ़ें और कभी एक दिन में दो तिथियाँ या दो दिन में एक तिथि क्यों दिखती है।
**मुख्य बातें** - चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12 अंश के अंतर पर एक तिथि पूरी होती है - एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं: शुक्ल पक्ष की 15 और कृष्ण पक्ष की 15 - तिथि किसी भी समय बदल सकती है, इसलिए एक ही दिन में दो तिथियाँ आ सकती हैं - त्योहार सामान्यतः उस तिथि के अनुसार तय होते हैं जो सूर्योदय के समय हो (उदय तिथि) - स्थानीय सूर्योदय के कारण तिथि का दिन शहर के अनुसार बदल सकता है
तिथि कैसे बनती है?
चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए सूर्य से एक निश्चित कोण पर रहता है। अमावस्या पर चंद्रमा और सूर्य एक ही दिशा में होते हैं। जैसे-जैसे चंद्रमा आगे बढ़ता है, दोनों के बीच का कोण बढ़ता है। इस कोण में हर 12 अंश की वृद्धि एक तिथि कहलाती है। 360 अंश के पूरे चक्र में 30 तिथियाँ होती हैं। चूँकि चंद्रमा की गति सब समय एक-सी नहीं रहती, इसलिए तिथि की अवधि घटती-बढ़ती रहती है, लगभग 19 से 26 घंटे तक।
शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की पहचान
- शुक्ल पक्ष: अमावस्या के बाद शुरू होता है और पूर्णिमा तक चलता है। इसमें चंद्रमा बढ़ता है।
- कृष्ण पक्ष: पूर्णिमा के बाद शुरू होता है और अमावस्या तक चलता है। इसमें चंद्रमा घटता है।
हर पक्ष में पंद्रह तिथियाँ होती हैं। सभी तिथियों के नाम और उनसे जुड़े पर्व हिंदू तिथियों की सूची में दिए हैं।
आज की तिथि कैसे पढ़ें?
पंचांग में आपको तिथि का नाम, पक्ष, और उसकी शुरुआत व समाप्ति का समय मिलता है। उदाहरण के लिए "शुक्ल पंचमी, सुबह 7:10 से अगले दिन सुबह 6:40 तक" पढ़ने का अर्थ है कि उस पूरी अवधि में पंचमी तिथि चलती रहेगी। इस साइट का आज की तिथि और पंचांग पेज आपकी लोकेशन के अनुसार तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल और चौघड़िया के प्रारंभ-समाप्ति समय दिखाता है।
उदय तिथि का नियम
तिथि दिन के किसी भी समय बदल सकती है, पर कैलेंडर में दिन तो सूर्योदय से सूर्योदय तक गिना जाता है। इसलिए अधिकांश पर्वों और व्रतों के लिए वही तिथि मानी जाती है जो सूर्योदय के समय चल रही हो, जिसे उदय तिथि कहते हैं। हर पर्व पर यही नियम लागू नहीं होता। उदाहरण के लिए करवा चौथ में चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि का होना देखा जाता है, और दीपावली में प्रदोष काल में अमावस्या का होना।
क्षय तिथि और वृद्धि तिथि
- वृद्धि तिथि: जब कोई तिथि दो सूर्योदयों को पार कर लेती है, यानी दो दिनों तक सूर्योदय के समय बनी रहती है।
- क्षय तिथि: जब कोई तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाती है, यानी किसी भी सूर्योदय के समय नहीं आती, तो वह तिथि कैलेंडर में गिनी ही नहीं जाती।
यही कारण है कि कभी पंचांग में एक तिथि दो दिन दिखती है और कभी एक तिथि गायब मिलती है। इसी कारण कई बार अलग-अलग पंचांगों में पर्व की तारीख एक दिन आगे-पीछे दिखती है, जैसे दीपावली 2026 में नरक चतुर्दशी और गोवर्धन पूजा की तारीखें।
पंचांग के बाकी चार अंग
तिथि पंचांग के पाँच अंगों में से एक है। बाकी चार (वार, नक्षत्र, योग और करण) की जानकारी पंचांग क्या है लेख में है। अशुभ समय के लिए राहुकाल और शुभ-अशुभ घड़ियों के लिए चौघड़िया भी पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तिथि क्या होती है?
तिथि हिंदू पंचांग की चंद्र दिन की इकाई है। चंद्रमा और सूर्य के बीच हर 12 अंश के अंतर पर एक तिथि पूरी होती है, और एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं।
आज की तिथि कैसे पता करें?
अपने शहर का पंचांग देखें, जिसमें तिथि का नाम, पक्ष और शुरू-खत्म का समय मिलता है। तिथि सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार शहर में थोड़ी बदल सकती है।
उदय तिथि क्या होती है?
जो तिथि सूर्योदय के समय चल रही हो उसे उदय तिथि कहते हैं, और अधिकांश पर्व-व्रत के लिए यही तिथि मानी जाती है। कुछ पर्वों, जैसे करवा चौथ, के नियम अलग होते हैं।
क्षय तिथि और वृद्धि तिथि क्या हैं?
जो तिथि किसी भी सूर्योदय के समय नहीं आती उसे क्षय तिथि कहते हैं और कैलेंडर में गिनी नहीं जाती। जो तिथि दो सूर्योदयों तक बनी रहे उसे वृद्धि तिथि कहते हैं।