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    हिंदू तिथियों की सूची: शुक्ल और कृष्ण पक्ष की 15 तिथियों के नाम और उनसे जुड़े पर्व

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    प्रतिपदा से पूर्णिमा और अमावस्या तक हिंदू तिथियों की पूरी सूची। शुक्ल और कृष्ण पक्ष की 15 तिथियाँ, उनके नाम और हर तिथि से जुड़े प्रमुख पर्व व व्रत एक तालिका में।

    हिंदू चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं, हर पक्ष में पंद्रह। प्रतिपदा से चतुर्दशी तक चौदह तिथियों के नाम दोनों पक्षों में एक-से हैं। पंद्रहवीं तिथि शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष में अमावस्या कहलाती है। तिथि के बनने और उसे पढ़ने का तरीका आज की तिथि कैसे देखें में है।

    **मुख्य बातें** - शुक्ल पक्ष अमावस्या के बाद शुरू होकर पूर्णिमा पर और कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद शुरू होकर अमावस्या पर समाप्त होता है - प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, फिर पूर्णिमा या अमावस्या - कौन-सा पर्व किस तिथि को आता है, इसकी तालिका नीचे दी गई है

    15 तिथियों के नाम

    क्रमतिथिकुछ प्रमुख पर्व और व्रत
    1प्रतिपदागोवर्धन पूजा (कार्तिक शुक्ल), गुड़ी पड़वा और चैत्र नवरात्रि का आरंभ (चैत्र शुक्ल)
    2द्वितीयाभाई दूज (कार्तिक शुक्ल)
    3तृतीयाहरतालिका तीज (भाद्रपद शुक्ल), अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल)
    4चतुर्थीगणेश चतुर्थी (शुक्ल पक्ष), संकष्टी चतुर्थी और करवा चौथ (कृष्ण पक्ष)
    5पंचमीवसंत पंचमी (माघ शुक्ल), नाग पंचमी (श्रावण शुक्ल), विवाह पंचमी (मार्गशीर्ष शुक्ल)
    6षष्ठीछठ पूजा (कार्तिक शुक्ल)
    7सप्तमीरथ सप्तमी (माघ शुक्ल), सूर्य उपासना
    8अष्टमीदुर्गा अष्टमी, राधा अष्टमी (भाद्रपद शुक्ल), जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्ण)
    9नवमीराम नवमी (चैत्र शुक्ल)
    10दशमीविजयादशमी या दशहरा (आश्विन शुक्ल)
    11एकादशीविष्णु जी का एकादशी व्रत, हर पक्ष में
    12द्वादशीएकादशी व्रत का पारण
    13त्रयोदशीप्रदोष व्रत (दोनों पक्ष), धनतेरस (कार्तिक कृष्ण)
    14चतुर्दशीमासिक शिवरात्रि (कृष्ण पक्ष), महाशिवरात्रि (फाल्गुन कृष्ण), नरक चतुर्दशी, अनंत चतुर्दशी (भाद्रपद शुक्ल)
    15पूर्णिमा (शुक्ल) / अमावस्या (कृष्ण)पूर्णिमा: सत्यनारायण पूजा, गुरु पूर्णिमा, होली, रक्षा बंधन, कार्तिक पूर्णिमा। अमावस्या: दीपावली (कार्तिक), पितृ तर्पण, मौनी अमावस्या (माघ)

    शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष में अंतर

    • शुक्ल पक्ष (उजाला पखवाड़ा): इसमें चंद्रमा की कला बढ़ती है और अंत में पूर्णिमा आती है।
    • कृष्ण पक्ष (अँधेरा पखवाड़ा): इसमें चंद्रमा की कला घटती है और अंत में अमावस्या आती है।

    एक ही नाम की तिथि दोनों पक्षों में आती है, इसलिए पंचांग में तिथि के साथ पक्ष का नाम भी पढ़ें। जैसे शुक्ल चतुर्थी गणेश चतुर्थी है, और कृष्ण चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी या करवा चौथ है।

    कुछ तिथियों के देवता और व्रत

    कई तिथियाँ किसी देवता से जुड़ी मानी जाती हैं। चतुर्थी गणेश जी की, एकादशी विष्णु जी की, त्रयोदशी का प्रदोष शिव जी का, और अष्टमी देवी या कृष्ण से जुड़ी है। इनके बारे में विस्तार से पढ़ें: एकादशी व्रत: महत्व और नियम, प्रदोष व्रत की विधि और संकष्टी चतुर्थी व्रत विधि।

    आज कौन-सी तिथि है?

    आज की तिथि और उसका समय अपने शहर के लिए तिथि और पंचांग पेज पर देखें।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    हिंदू तिथियाँ कितनी होती हैं?

    एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं: शुक्ल पक्ष की 15 और कृष्ण पक्ष की 15।

    15 तिथियों के नाम क्या हैं?

    प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, और पंद्रहवीं तिथि शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा तथा कृष्ण पक्ष में अमावस्या।

    शुक्ल और कृष्ण पक्ष में क्या अंतर है?

    शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है और अंत में पूर्णिमा आती है। कृष्ण पक्ष में चंद्रमा घटता है और अंत में अमावस्या आती है।

    एकादशी और प्रदोष किस तिथि पर आते हैं?

    एकादशी व्रत 11वीं तिथि को और प्रदोष व्रत 13वीं तिथि (त्रयोदशी) को, दोनों पक्षों में रखा जाता है।