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    संकष्टी चतुर्थी व्रत क्या है? विधि, चंद्रोदय पर अर्घ्य, अंगारकी चतुर्थी और पूजा सामग्री

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    संकष्टी चतुर्थी व्रत क्या है और कैसे रखें? कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, गणेश पूजा की विधि, चंद्रोदय पर अर्घ्य देकर व्रत खोलना, अंगारकी चतुर्थी और पूजा सामग्री।

    संकष्टी चतुर्थी हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश के लिए रखा जाने वाला व्रत है। 'संकष्टी' का अर्थ है संकट को हरने वाली। भक्त दिनभर उपवास रखकर शाम को गणेश जी की पूजा करते हैं और चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के बाद व्रत खोलते हैं।

    **मुख्य बातें** - तिथि: हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी - पूजा गणेश जी की होती है, और व्रत चंद्रोदय के बाद खोला जाता है - चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें - मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी अंगारकी चतुर्थी कहलाती है - शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है, जिसका नाम गणेश चतुर्थी से मिलता है

    संकष्टी चतुर्थी कब आती है?

    हर चंद्र मास में दो चतुर्थी आती हैं। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी है और शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी। इस व्रत में चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि का होना देखा जाता है। इसलिए तारीख का निर्णय उदय तिथि से नहीं, चंद्रोदय के समय की तिथि से होता है। तिथि कैसे बनती है, यह आज की तिथि कैसे देखें में समझाया गया है। करवा चौथ भी कृष्ण चतुर्थी का व्रत है, जिसे यहाँ पढ़ें।

    संकष्टी चतुर्थी व्रत की विधि

    1. 1.सुबह स्नान करके गणेश जी का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
    2. 2.दिनभर फलाहार लें या अपनी क्षमता के अनुसार उपवास रखें।
    3. 3.शाम को गणेश जी की मूर्ति या चित्र की पूजा करें। उन्हें लाल फूल, दूर्वा (दूब की घास), सिंदूर और मोदक या लड्डू अर्पित करें।
    4. 4.ॐ गं गणपतये नमः का जप करें और गणेश आरती गाएँ।
    5. 5.संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा सुनें।
    6. 6.चंद्रमा निकलने पर उसके दर्शन करें, उसे जल का अर्घ्य दें और फिर व्रत खोलें।

    पूजा सामग्री

    गणेश जी की मूर्ति या चित्र, लाल फूल, दूर्वा, सिंदूर, मोदक या लड्डू, फल, दीपक, धूप और अर्घ्य के लिए जल। दूर्वा गणेश जी को विशेष प्रिय मानी जाती है।

    अंगारकी चतुर्थी

    जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है, क्योंकि मंगल का एक नाम अंगारक है। इसे विशेष महत्व की संकष्टी माना जाता है।

    माघ की सकट चौथ

    माघ मास की कृष्ण चतुर्थी उत्तर भारत में सकट चौथ के नाम से प्रसिद्ध है और उस वर्ष की प्रमुख संकष्टी चतुर्थियों में गिनी जाती है।

    ध्यान रखें

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    संकष्टी चतुर्थी कब आती है?

    हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को। इसमें चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि का होना देखा जाता है।

    संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब खोला जाता है?

    चंद्रोदय के बाद। चंद्रमा के दर्शन करके उसे जल का अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है।

    अंगारकी चतुर्थी क्या है?

    जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ती है, तो उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं, क्योंकि मंगल का एक नाम अंगारक है।

    संकष्टी चतुर्थी की पूजा में क्या चढ़ाएँ?

    गणेश जी को लाल फूल, दूर्वा (दूब), सिंदूर और मोदक या लड्डू अर्पित किए जाते हैं।