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    देव दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा 2026: तिथि, दीपदान, गंगा स्नान और महत्व

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    देव दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा 2026 मंगलवार, 24 नवंबर को है। काशी की देव दीपावली, दीपदान, गंगा स्नान, त्रिपुरारी पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती।

    देव दीपावली 2026 मंगलवार, 24 नवंबर को है, यही कार्तिक पूर्णिमा भी है। पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर की रात से शुरू होकर 24 नवंबर की शाम तक रहती है, और पूजा-स्नान का पर्व उदय तिथि के अनुसार 24 नवंबर को माना जाता है। यह दीपावली के लगभग पंद्रह दिन बाद आती है।

    **मुख्य बातें** - देव दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा: मंगलवार, 24 नवंबर 2026 - वाराणसी (काशी) के गंगा घाटों पर लाखों दीपक जलाकर यह पर्व मनाया जाता है - इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और दान का विशेष महत्व माना जाता है - इसी तिथि को शिव जी के त्रिपुरारी रूप की कथा, गुरु नानक जयंती और पुष्कर मेले का समापन भी जुड़ा है - पूर्णिमा तिथि के आरंभ-अंत का समय शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखें

    देव दीपावली 2026 की तिथि

    विवरणजानकारी
    पर्वदेव दीपावली / कार्तिक पूर्णिमा
    तिथिमंगलवार, 24 नवंबर 2026
    पूर्णिमा तिथि23 नवंबर की रात से 24 नवंबर की शाम तक

    तिथि के शुरू और खत्म होने का समय अलग-अलग पंचांगों में थोड़ा अलग छपता है, इसलिए स्नान और दीपदान का समय तय करने के लिए अपने शहर का पंचांग यहाँ देखें।

    देव दीपावली क्यों मनाई जाती है?

    मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा को देवता दीपावली मनाने पृथ्वी पर, विशेषकर काशी में, गंगा तट पर उतरते हैं। इसीलिए इसे देव दीपावली कहते हैं। इस तिथि का संबंध त्रिपुरारी पूर्णिमा से भी है, क्योंकि कथा के अनुसार शिव जी ने इसी दिन त्रिपुरासुर का संहार किया था, और इसी कारण वे त्रिपुरारी कहलाए।

    काशी की देव दीपावली

    वाराणसी में इस दिन गंगा के घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं। घाटों की सीढ़ियाँ दीपों से जगमगा उठती हैं और गंगा आरती का भव्य आयोजन होता है। यह दृश्य देखने दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। पास में स्थित काशी विश्वनाथ का इतिहास और महत्व भी पढ़ें।

    घर पर कैसे मनाएँ?

    1. 1.सुबह गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यह संभव न हो तो घर के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
    2. 2.शाम को घर के द्वार, तुलसी के पास और पूजा स्थान पर दीपक जलाएँ। दीपक का महत्व यहाँ पढ़ें।
    3. 3.भगवान विष्णु, शिव जी या अपने इष्ट देवता की पूजा करें। शिव आरती और विष्णु आरती भी गाई जा सकती हैं।
    4. 4.अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या दीपक का दान करें।

    कार्तिक पूर्णिमा से जुड़े अन्य पर्व

    कार्तिक पूर्णिमा को गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) भी मनाई जाती है। राजस्थान के पुष्कर में इसी समय पुष्कर मेले का समापन होता है। पूरे कार्तिक मास में दीपदान और नदी स्नान की परंपरा रहती है, जिसकी पूर्णाहुति इस पूर्णिमा पर मानी जाती है। इसके बारे में कार्तिक मास 2026 के नियम में पढ़ें।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    देव दीपावली 2026 कब है?

    देव दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा 2026 में मंगलवार, 24 नवंबर को है। पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर की रात से 24 नवंबर की शाम तक रहती है।

    देव दीपावली क्यों मनाई जाती है?

    मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा को देवता दीपावली मनाने पृथ्वी पर, विशेषकर काशी के गंगा तट पर, उतरते हैं। इसी तिथि को शिव जी ने त्रिपुरासुर का वध किया था।

    देव दीपावली कहाँ सबसे प्रसिद्ध है?

    वाराणसी (काशी) में, जहाँ गंगा के घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं और भव्य गंगा आरती होती है।

    कार्तिक पूर्णिमा पर और कौन-सा पर्व होता है?

    इसी दिन गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) मनाई जाती है और पुष्कर मेले का समापन भी इसी समय होता है।