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    शुक्रवार व्रत विधि: संतोषी माता, लक्ष्मी पूजा, 16 शुक्रवार और खटाई के नियम

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    शुक्रवार व्रत कैसे रखें? संतोषी माता के 16 शुक्रवार, गुड़-चने का भोग, खटाई न खाने का नियम, उद्यापन की विधि और शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा का महत्व।

    शुक्रवार संतोषी माता और देवी लक्ष्मी (दुर्गा) का दिन माना जाता है। इस दिन सबसे प्रचलित व्रत संतोषी माता का है, जो लगातार 16 शुक्रवार तक रखा जाता है। कई लोग शुक्रवार को लक्ष्मी जी की पूजा भी करते हैं। संतोषी माता के व्रत की सबसे प्रसिद्ध बात यह नियम है कि उस दिन घर में खटाई नहीं खाई जाती।

    **मुख्य बातें** - दिन: शुक्रवार, संतोषी माता और लक्ष्मी का दिन - संतोषी माता का भोग गुड़ और भुना चना है - व्रत के दिन खटाई (खट्टी चीज़ें) न खाने का नियम है - व्रत 16 शुक्रवार तक रखकर उद्यापन किया जाता है - लक्ष्मी उपासना के लिए शुक्रवार की शाम विशेष मानी जाती है

    संतोषी माता व्रत की विधि

    1. 1.सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
    2. 2.पूजा स्थान पर संतोषी माता की मूर्ति या चित्र रखें और दीपक जलाएँ।
    3. 3.माता को गुड़ और भुने चने का भोग लगाएँ। कलश में जल रखकर उस पर गुड़-चने की कटोरी रखने की परंपरा भी है।
    4. 4.संतोषी माता की व्रत कथा सुनें और संतोषी माता की आरती करें।
    5. 5.गुड़-चना प्रसाद के रूप में बाँटें और स्वयं भी खाएँ।
    6. 6.दिन में एक समय भोजन करें, जिसमें खटाई न हो।

    खटाई का नियम

    इस व्रत का सबसे प्रसिद्ध नियम है कि व्रत के दिन घर में खटाई, यानी खट्टी चीज़ें जैसे नींबू, अचार, इमली, दही या खट्टे फल, न खाई जाती हैं और न दूसरों को परोसी जाती हैं। यह नियम व्रती और घर के सदस्य दोनों पर लागू माना जाता है।

    16 शुक्रवार और उद्यापन

    व्रत लगातार 16 शुक्रवार तक रखा जाता है। अंतिम शुक्रवार को उद्यापन किया जाता है, जिसमें परंपरा के अनुसार आठ बच्चों को भोजन कराया जाता है। उनके भोजन में भी खटाई नहीं रखी जाती। उद्यापन के बाद व्रत पूर्ण माना जाता है।

    शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा

    शुक्रवार की शाम लक्ष्मी जी की पूजा के लिए भी शुभ मानी जाती है। इस दिन दीपक जलाकर और लक्ष्मी आरती गाकर, ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः का जप किया जा सकता है। दीपक का महत्व दीपक जलाने का महत्व में पढ़ें।

    ध्यान रखें

    • व्रत श्रद्धा और संयम का अभ्यास है। किसी परिणाम की गारंटी न मानें।
    • स्वास्थ्य के अनुसार आहार चुनें।
    • हफ़्ते के हर दिन का देवता जानने के लिए कौन सा दिन किस भगवान का पढ़ें।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    शुक्रवार का व्रत किसके लिए रखा जाता है?

    शुक्रवार संतोषी माता और देवी लक्ष्मी का दिन माना जाता है। सबसे प्रचलित व्रत संतोषी माता का है।

    संतोषी माता व्रत में क्या नियम है?

    व्रत के दिन खटाई, यानी खट्टी चीज़ें जैसे नींबू, अचार, इमली या दही, न खाई जाती हैं और न दूसरों को परोसी जाती हैं।

    संतोषी माता का व्रत कितने शुक्रवार रखा जाता है?

    लगातार 16 शुक्रवार तक, और अंतिम शुक्रवार को उद्यापन किया जाता है।

    संतोषी माता को क्या भोग लगाते हैं?

    गुड़ और भुना चना संतोषी माता का भोग है, जो प्रसाद के रूप में भी बाँटा जाता है।