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    15 फरवरी

    महाशिवरात्रि

    भगवान शिव की महान रात्रि

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    ⏳ 131 दिन शेष (2027)

    इतिहास

    महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी रात्रि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। एक अन्य कथा के अनुसार, इसी रात्रि शिवजी ने सृष्टि की रक्षा हेतु समुद्र मंथन से निकले विष का पान किया था, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए।

    महत्व

    महाशिवरात्रि आत्मसंयम, ध्यान और शिव तत्व — चेतना के शुद्धतम स्वरूप — की उपासना का पर्व है। भक्त रात्रि भर जागरण कर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते हैं।

    पूजा विधि

    दिनभर व्रत रखें। शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र से अभिषेक करें। रात्रि के चारों प्रहर में पूजा-अर्चना कर शिव तांडव स्तोत्र या रुद्राष्टक का पाठ करें। अगले दिन प्रातः व्रत का पारण करें।

    मंत्र

    ॐ नमः शिवाय॥

    Om Namah Shivaya॥

    यह पंचाक्षर मंत्र है — 'मैं शिव को नमन करता हूं' — जो आत्मशुद्धि और शिव तत्व के साथ एकत्व का प्रतीक है।

    मुहूर्त

    पूजा रात्रि के चारों प्रहरों में की जाती है; निशीथ काल (मध्यरात्रि) विशेष शुभ माना जाता है। सटीक समय हेतु पंचांग देखें।

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    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • • शिवलिंग पर बेलपत्र व जल अर्पित करें
    • • रात्रि के चारों प्रहर में पूजा करें
    • • "ॐ नमः शिवाय" का निरंतर जाप करें
    • • व्रत का पारण अगले दिन विधिपूर्वक करें

    ❌ क्या न करें

    • • शिवलिंग पर हल्दी या कुमकुम अर्पित न करें
    • • बेलपत्र कटा या टूटा हुआ न चढ़ाएं
    • • व्रत के दौरान क्रोध या वाद-विवाद से बचें
    • • पूजा में शंख से जल अर्पण न करें (परंपरा अनुसार)

    FAQ

    रात्रि जागरण आत्म-अनुशासन और सजगता का प्रतीक है, जो मन को सांसारिक विकर्षणों से हटाकर शिव तत्व में केंद्रित करने में सहायक माना जाता है।