8 नवंबर
दीपावली
प्रकाश का पर्व — अंधकार पर प्रकाश की विजय
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दीपावली या दीवाली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर, रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे, और अयोध्यावासियों ने घी के दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। कुछ परंपराओं में इस दिन को भगवान विष्णु द्वारा नरकासुर के वध और देवी लक्ष्मी के समुद्र मंथन से प्रकट होने से भी जोड़ा जाता है। पाँच दिवसीय उत्सव धनतेरस से आरंभ होकर भाई दूज पर समाप्त होता है।
महत्व
दीपावली अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। इस दिन घरों को दीपों और रंगोली से सजाया जाता है, देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है ताकि आने वाले वर्ष में समृद्धि, बुद्धि और सुख-शांति बनी रहे।
पूजा विधि
घर की सफाई और सजावट के बाद, संध्या समय शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। दीपक, कुमकुम, अक्षत, फूल और मिठाई अर्पित करें। "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" का जाप करते हुए आरती करें। घर के हर कोने में दीप जलाएं ताकि अंधकार पूर्णतः दूर हो।
मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः॥
Om Hreem Shreem Lakshmibhyo Namah॥
यह लक्ष्मी बीज मंत्र है, जिसका जाप समृद्धि, ऐश्वर्य और सौभाग्य प्राप्ति हेतु किया जाता है।
मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) और स्थिर लग्न सर्वोत्तम माने जाते हैं। सटीक मुहूर्त प्रतिवर्ष तिथि-नक्षत्र के अनुसार बदलता है — उस वर्ष का सटीक समय हमारे पंचांग पेज पर देखें।
आज का पंचांग देखें →क्या करें व क्या न करें
✅ क्या करें
- • घर के मुख्य द्वार और हर कमरे में दीप जलाएं
- • स्थिर लग्न में लक्ष्मी-गणेश पूजा करें
- • घर की उत्तर दिशा में तिजोरी/बहीखाता रखकर पूजा करें
- • साफ-सफाई और रंगोली से घर सजाएं
❌ क्या न करें
- • पूजा के दौरान काले वस्त्र पहनने से बचें
- • घर में अंधेरे कोने न छोड़ें
- • पूजा से पहले मांस-मदिरा का सेवन न करें
- • पटाखे जलाते समय सुरक्षा की अनदेखी न करें