त्योहार सूची

    14 जनवरी

    मकर संक्रांति

    सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व

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    ⏳ 99 दिन शेष (2027)

    इतिहास

    मकर संक्रांति उस दिन मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, जिससे सूर्य का उत्तरायण आरंभ होता है। यह भारत के सौर कैलेंडर पर आधारित त्योहारों में से एक है, इसलिए इसकी तिथि प्रतिवर्ष लगभग स्थिर (14-15 जनवरी) रहती है, जबकि अधिकांश हिंदू पर्व चंद्र कैलेंडर के अनुसार बदलते हैं।

    महत्व

    उत्तरायण को शुभ काल माना जाता है, जब दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं। यह पर्व फसल कटाई के उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है और भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पोंगल, बिहू, लोहड़ी जैसे नामों से जाना जाता है।

    पूजा विधि

    प्रातः पवित्र नदी में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य दें। तिल-गुड़ के लड्डू बनाकर बांटें और खाएं — "तिल-गुड़ लो, मीठा बोलो" की भावना के साथ। दान-पुण्य करना इस दिन विशेष शुभ माना जाता है।

    मंत्र

    ॐ सूर्याय नमः॥

    Om Suryaya Namah॥

    यह सूर्य देव को समर्पित सरल मंत्र है, जो स्वास्थ्य, ऊर्जा और तेज प्राप्ति हेतु जपा जाता है।

    मुहूर्त

    सूर्योदय के समय स्नान-दान करना सर्वोत्तम माना जाता है। संक्रांति का सटीक क्षण प्रतिवर्ष बदलता है — पंचांग पेज पर देखें।

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    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • • सूर्योदय के समय पवित्र नदी में स्नान करें
    • • सूर्य देव को अर्घ्य दें
    • • तिल-गुड़ के लड्डू बांटें और खाएं
    • • यथाशक्ति अन्न, वस्त्र या तिल का दान करें

    ❌ क्या न करें

    • • इस दिन तामसिक भोजन से बचें
    • • किसी जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएं
    • • पतंग उड़ाते समय चाइनीज़ मांझे का प्रयोग न करें
    • • सूर्योदय से पहले सोए न रहें, स्नान-दान का समय न चूकें

    FAQ

    क्योंकि यह सूर्य की गति पर आधारित सौर पर्व है, न कि चंद्र तिथि पर, इसलिए यह ग्रेगोरियन कैलेंडर में लगभग स्थिर तिथि (14-15 जनवरी) पर पड़ता है।