1 अगस्त
रक्षा बंधन
भाई-बहन के स्नेह और रक्षा का पर्व
इतिहास
रक्षा बंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसकी कई कथाएँ प्रचलित हैं — एक के अनुसार देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधी थी; दूसरी प्रसिद्ध कथा में द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की उंगली पर बंधी घाव को अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधकर ढका था, जिसके प्रत्युत्तर में कृष्ण ने सदैव उनकी रक्षा का वचन दिया था।
महत्व
यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और परस्पर रक्षा के वचन का प्रतीक है। बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी दीर्घायु की कामना करती हैं, और भाई सुरक्षा का वचन देते हैं।
पूजा विधि
प्रातः स्नान के बाद पूजा की थाली सजाएं जिसमें राखी, रोली, अक्षत और मिठाई हो। भाई के माथे पर तिलक लगाकर आरती करें और राखी बांधें। भाई बहन को उपहार देकर रक्षा का वचन देते हैं।
मुहूर्त
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि के दिन भद्रा काल को छोड़कर देखा जाता है। सटीक समय हेतु पंचांग देखें।
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