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    28 अगस्त

    रक्षा बंधन

    भाई-बहन के स्नेह और रक्षा का पर्व

    ⏳ 325 दिन शेष (2027)

    इतिहास

    रक्षा बंधन श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसकी कई कथाएँ प्रचलित हैं — एक के अनुसार देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधी थी; दूसरी प्रसिद्ध कथा में द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की उंगली पर बंधी घाव को अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधकर ढका था, जिसके प्रत्युत्तर में कृष्ण ने सदैव उनकी रक्षा का वचन दिया था।

    महत्व

    यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और परस्पर रक्षा के वचन का प्रतीक है। बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी दीर्घायु की कामना करती हैं, और भाई सुरक्षा का वचन देते हैं।

    पूजा सामग्री सूची

    • राखी (एक या अधिक)
    • रोली/कुमकुम
    • अक्षत (साबुत चावल)
    • दीपक व घी/तेल की बाती
    • मिठाई
    • आरती की थाली
    • नारियल (कुछ परिवारों में प्रचलित, अनिवार्य नहीं)

    पूजा विधि

    प्रातः स्नान के बाद पूजा की थाली सजाएं जिसमें राखी, रोली, अक्षत और मिठाई हो। भाई के माथे पर तिलक लगाकर आरती करें और राखी बांधें। भाई बहन को उपहार देकर रक्षा का वचन देते हैं।

    मुहूर्त

    राखी बांधने का शुभ मुहूर्त पूर्णिमा तिथि के दिन भद्रा काल को छोड़कर देखा जाता है। सटीक समय हेतु पंचांग देखें।

    आज का पंचांग देखें →

    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • • भद्रा काल को छोड़कर शुभ मुहूर्त में राखी बांधें
    • • भाई के माथे पर तिलक लगाकर आरती करें
    • • राखी बांधने से पहले भाई का मुंह मीठा कराएं
    • • दूर रहने वाले भाई-बहन एक-दूसरे को राखी डाक/कूरियर से भेजें

    ❌ क्या न करें

    • • भद्रा काल में राखी न बांधें
    • • टूटी या कटी हुई राखी का प्रयोग न करें
    • • राखी बांधते समय भाई का सिर ढका न हो, यह ध्यान रखें
    • • इस दिन भाई-बहन आपस में विवाद न करें

    FAQ

    भद्रा काल को अशुभ माना जाता है और परंपरा के अनुसार इस दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित होता है, इसलिए राखी बांधने के लिए भद्रा रहित मुहूर्त चुना जाता है।