अर्थ
मैं सूर्य को नमन करता हूँ। सूर्य को प्रत्यक्ष देव कहा जाता है, क्योंकि वे अकेले देवता हैं जिन्हें हम रोज़ अपनी आँखों से देखते हैं।
परिचय
सूर्य नमस्कार के हर आसन के साथ सूर्य का एक नाम लिया जाता है, ॐ मित्राय नमः, ॐ रवये नमः, और तीसरा यही, ॐ सूर्याय नमः। सुबह अर्घ्य देते समय भी बहुत लोग इसे बोलते हैं। सूर्य उपासना का सबसे बड़ा रूप छठ में बिहार और पूर्वांचल के घाटों पर दिखता है, और फिर मकर संक्रांति पर।
जप कैसे करें
सूर्योदय के समय पूर्व की ओर मुँह करके, ताँबे के लोटे से जल चढ़ाते हुए। सूर्य नमस्कार करते हैं तो तीसरे आसन के साथ।
कब जपें: सूर्योदय के समय, ख़ासकर रविवार को।
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