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    प्रसिद्ध मंदिर

    खजुराहो मंदिर समूह

    खजुराहो, छतरपुर जिला, मध्य प्रदेश

    चंदेल वंश की अद्भुत नागर स्थापत्य शैली का यूनेस्को विश्व धरोहर समूह

    एक नज़र में

    स्थान
    खजुराहो, छतरपुर जिला, मध्य प्रदेश
    आराध्य
    भगवान शिव, विष्णु व जैन तीर्थंकर (विभिन्न मंदिरों में)
    श्रेणी
    प्रसिद्ध मंदिर
    परंपरा
    शैव
    निकटतम रेलवे स्टेशन
    खजुराहो रेलवे स्टेशन (नगर में ही स्थित, मंदिर समूह से लगभग 5-6 किमी)
    निकटतम हवाई अड्डा
    खजुराहो हवाई अड्डा (लगभग 5 किमी)
    घूमने का सर्वोत्तम समय
    अक्टूबर से मार्च; खजुराहो नृत्य महोत्सव (फरवरी) एक प्रसिद्ध सांस्कृतिक आयोजन है।

    इतिहास

    खजुराहो के मंदिरों का निर्माण चंदेल वंश के शासकों द्वारा लगभग 950 से 1050 ई. के मध्य करवाया गया था। मूलतः यहाँ लगभग 85 मंदिर थे, जिनमें से आज लगभग 25 शेष हैं, जो पश्चिमी, पूर्वी व दक्षिणी — तीन समूहों में विभाजित हैं। पश्चिमी समूह, जिसमें कंदरिया महादेव मंदिर है, तीनों में सबसे सुसंरक्षित है और अधिकांश दर्शनार्थी इसी को देखते हैं।

    धार्मिक महत्व

    खजुराहो अपनी बारीक नक्काशी व मूर्तिकला के लिए विश्वप्रसिद्ध है, जो मानव जीवन के विविध पहलुओं — आध्यात्मिक, सामाजिक व कलात्मक — को एक साथ चित्रित करती है, जिसे 1986 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

    यात्रा की योजना

    दर्शन समय

    प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 6:00 बजे तक (सांय पश्चिमी समूह में ध्वनि-प्रकाश शो भी आयोजित होता है)।

    त्योहारों और विशेष अवसरों पर समय बदल जाता है। निकलने से पहले मंदिर के आधिकारिक स्रोत से पुष्टि कर लें।

    खजुराहो रेलवे स्टेशन दिल्ली व अन्य शहरों से सीमित किंतु सीधी ट्रेनों द्वारा जुड़ा है; झांसी (लगभग 175 किमी) एक बड़ा जंक्शन विकल्प भी है। स्टेशन से मंदिर तक ऑटो व टैक्सी उपलब्ध हैं।

    भगवान शिव की भक्ति आगे बढ़ाएँ

    इसी देवता से जुड़ी सामग्री, इसी साइट पर।

    सामान्य प्रश्न

    इतिहासकारों के अनुसार यहाँ मूलतः लगभग 85 मंदिर थे, जिनमें से आज केवल लगभग 25 ही शेष हैं।