प्रसिद्ध मंदिर
श्री वराह लक्ष्मी नरसिंहस्वामी मंदिर, सिंहाचलम्
जहाँ मूर्ति सदा चंदन के लेप से ढकी रहती है — वर्ष में केवल एक दिन वास्तविक स्वरूप के दर्शन होते हैं
सिंहाचलम्, विशाखापत्तनम्, आंध्र प्रदेश
इतिहास
सिंहाचलम् मंदिर पहाड़ी पर स्थित है और भगवान विष्णु के वराह व नरसिंह दोनों अवतारों के संयुक्त रूप को समर्पित है। मंदिर की अनूठी परंपरा यह है कि मूर्ति सदैव चंदन के मोटे लेप से ढकी रहती है (क्योंकि मूल रूप अत्यंत उग्र माना जाता है), और केवल अक्षय तृतीया के दिन ही चंदन हटाकर वास्तविक स्वरूप के दर्शन कराए जाते हैं, जिसे "नija रूप दर्शनम्" कहा जाता है।
महत्व
मंदिर आंध्र प्रदेश के सबसे प्राचीन व धनी मंदिरों में गिना जाता है, और यहाँ की स्थापत्य कला में चोल, गंग व विजयनगर काल की शैलियों का मिश्रण देखने को मिलता है।
निकटतम रेलवे स्टेशन
सिंहाचलम् रेलवे स्टेशन (निकट); विशाखापत्तनम् जंक्शन (लगभग 16 किमी, बड़ा जंक्शन)
निकटतम हवाई अड्डा
विशाखापत्तनम् हवाई अड्डा (लगभग 20 किमी)
दर्शन समय
प्रातः 4:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक।
सर्वोत्तम समय
अक्टूबर से फरवरी; अक्षय तृतीया (चंदन-यात्रा) विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
कैसे पहुँचें
विशाखापत्तनम् जंक्शन से टैक्सी व बस द्वारा सिंहाचलम् तक आसानी से पहुँचा जा सकता है; मंदिर की चढ़ाई हेतु घाट रोड व सीढ़ीदार मार्ग दोनों उपलब्ध हैं।
नोट: यात्रा से पहले दर्शन समय व परिवहन जानकारी की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से अवश्य करें, क्योंकि ये समय-समय पर बदल सकते हैं।