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    हिंदू कैलेंडर के 12 महीने: चैत्र से फाल्गुन तक नाम, पूर्णिमांत-अमांत, विक्रम संवत और अधिक मास

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    हिंदू कैलेंडर के 12 महीनों के नाम और उनका अंग्रेज़ी महीनों से मेल, पूर्णिमांत और अमांत पंचांग का अंतर, विक्रम संवत और शक संवत, और अधिक मास क्यों आता है।

    हिंदू कैलेंडर में बारह महीने होते हैं: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन। ये चंद्र मास हैं, यानी हर महीना चंद्रमा की कलाओं के एक चक्र पर आधारित है। इसी कारण हिंदू महीने अंग्रेज़ी महीनों से ठीक-ठीक मेल नहीं खाते और हर साल त्योहारों की अंग्रेज़ी तारीख बदलती रहती है।

    **मुख्य बातें** - चैत्र पहला और फाल्गुन आख़िरी महीना है, और लगभग हर महीना दो अंग्रेज़ी महीनों में फैला होता है - उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग चलता है और दक्षिण व पश्चिम के कई भागों में अमांत - चंद्र वर्ष सौर वर्ष से छोटा होने के कारण लगभग हर तीन साल में एक अधिक मास जोड़ा जाता है - 2026 में भी एक अधिक मास पड़ा, इसलिए इस वर्ष त्योहार पिछले साल की तुलना में लगभग तीन हफ़्ते देर से आ रहे हैं

    12 हिंदू महीने और उनके प्रमुख पर्व

    महीनालगभग अंग्रेज़ी महीनेकुछ प्रमुख पर्व
    चैत्रमार्च-अप्रैलगुड़ी पड़वा, राम नवमी
    वैशाखअप्रैल-मईअक्षय तृतीया, बुद्ध पूर्णिमा
    ज्येष्ठमई-जूनवट सावित्री, निर्जला एकादशी
    आषाढ़जून-जुलाईजगन्नाथ रथ यात्रा, गुरु पूर्णिमा
    श्रावणजुलाई-अगस्तरक्षा बंधन, नाग पंचमी
    भाद्रपदअगस्त-सितंबरहरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, अनंत चतुर्दशी
    आश्विनसितंबर-अक्टूबरशारदीय नवरात्रि, दशहरा
    कार्तिकअक्टूबर-नवंबरकरवा चौथ, दीपावली, छठ, देवउठनी एकादशी
    मार्गशीर्षनवंबर-दिसंबरविवाह पंचमी, गीता जयंती
    पौषदिसंबर-जनवरीपौष मास के व्रत और स्नान
    माघजनवरी-फरवरीवसंत पंचमी, मौनी अमावस्या
    फाल्गुनफरवरी-मार्चमहाशिवरात्रि, होली

    पूर्णिमांत और अमांत में अंतर

    महीना कहाँ से शुरू माना जाए, इसकी दो पद्धतियाँ हैं:

    • पूर्णिमांत: महीना पूर्णिमा पर समाप्त होता है और कृष्ण पक्ष से शुरू माना जाता है। उत्तर भारत में यही चलता है।
    • अमांत: महीना अमावस्या पर समाप्त होता है। महाराष्ट्र, गुजरात (कुछ हिस्सों), कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे क्षेत्रों में यह प्रचलित है।

    दोनों पद्धतियों में शुक्ल पक्ष में महीने का नाम एक ही रहता है, केवल कृष्ण पक्ष में नाम का अंतर आता है। इसी कारण कुछ पर्वों का महीना उत्तर और दक्षिण भारत में अलग बताया जाता है, पर पर्व की अंग्रेज़ी तारीख एक ही रहती है।

    विक्रम संवत और शक संवत

    भारत में दो प्रमुख संवत चलते हैं। विक्रम संवत ईसा पूर्व 57 में शुरू माना जाता है, इसलिए 2026 ई. में विक्रम संवत 2083 चलता है। शक संवत 78 ई. से शुरू होता है, और 2026 में शक संवत 1948 है। उत्तर भारत में नया वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है (गुड़ी पड़वा), जबकि गुजरात में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, यानी दीपावली के बाद।

    अधिक मास क्यों आता है?

    चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का। इस अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर 32 से 33 महीनों पर एक अतिरिक्त चंद्र मास जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास (मलमास या पुरुषोत्तम मास) कहते हैं। ऐसा न हो तो त्योहार मौसमों से खिसकते जाएँगे। अधिक मास आने पर उस वर्ष के त्योहार पिछले वर्ष की तुलना में कई हफ़्ते देर से आते हैं।

    तिथि और महीना साथ पढ़ें

    किसी पर्व की तारीख तय करने के लिए महीना, पक्ष और तिथि तीनों देखे जाते हैं। तिथि के बारे में आज की तिथि कैसे देखें और सभी तिथियों के लिए तिथियों की सूची पढ़ें। पंचांग की बुनियादी जानकारी पंचांग क्या है में है।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    हिंदू कैलेंडर के 12 महीने कौन-से हैं?

    चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन। चैत्र पहला और फाल्गुन आख़िरी महीना है।

    पूर्णिमांत और अमांत में क्या अंतर है?

    पूर्णिमांत में महीना पूर्णिमा पर समाप्त होता है (उत्तर भारत में प्रचलित), जबकि अमांत में अमावस्या पर (महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु आदि में)। शुक्ल पक्ष में महीने का नाम दोनों में एक ही रहता है।

    अधिक मास क्यों आता है?

    चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन का और सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर 32-33 महीनों में एक अतिरिक्त चंद्र मास जोड़ा जाता है।

    2026 में कौन-सा विक्रम संवत चल रहा है?

    2026 ई. में विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 चल रहा है।