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    1 मई

    बुद्ध पूर्णिमा

    भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान-प्राप्ति व महापरिनिर्वाण — तीनों का स्मृति-पर्व

    ⏳ 257 दिन शेष (2027)

    इतिहास

    बुद्ध पूर्णिमा वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है और इसे "वेसाक" भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ, इसी तिथि पर बोधगया में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति (बोधित्व) हुई, और इसी तिथि पर उन्होंने कुशीनगर में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया — तीनों महत्वपूर्ण घटनाओं का एक ही दिन घटित होना इसे बौद्ध परंपरा के सबसे पवित्र दिनों में से एक बनाता है। हिंदू परंपरा में भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु के दशावतारों में से एक माना जाता है।

    महत्व

    यह दिन करुणा, अहिंसा व मध्यम मार्ग के बुद्ध के उपदेशों का स्मरण कराता है, और बोधगया, सारनाथ व कुशीनगर जैसे बौद्ध तीर्थस्थलों में विशेष प्रार्थना सभाएँ आयोजित होती हैं।

    पूजा विधि

    प्रातः स्नान कर बुद्ध प्रतिमा के समक्ष दीप व पुष्प अर्पित करें, ध्यान व प्रार्थना करें, तथा करुणा व दान के भाव से जरूरतमंदों की सहायता करें।

    मुहूर्त

    पूर्णिमा तिथि के दौरान दिन भर प्रार्थना व ध्यान शुभ माना जाता है; सटीक तिथि हेतु पंचांग देखें।

    आज का पंचांग देखें →

    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • ध्यान व प्रार्थना में समय व्यतीत करें
    • करुणा व दान का भाव अपनाएं
    • बुद्ध की शिक्षाओं का अध्ययन करें

    ❌ क्या न करें

    • इस दिन हिंसा व क्रोध से दूर रहें
    • मांस-मदिरा का सेवन वर्जित माना जाता है

    FAQ

    'वेसाक' पाली भाषा में वैशाख मास के नाम से लिया गया शब्द है, जो इस पर्व के अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परंपरा में प्रचलित नाम के रूप में जाना जाता है।