15 नवंबर
छठ पूजा
सूर्य देव व छठी मैया की उपासना का चार-दिवसीय कठोर व्रत, बिहार-झारखंड-पूर्वी उत्तर प्रदेश का महापर्व
इतिहास
छठ पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को केंद्र में रखकर चार दिनों तक मनाई जाती है — नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य) व उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य)। यह सूर्य देव व उनकी बहन मानी जाने वाली छठी मैया (षष्ठी देवी) की आराधना का पर्व है, जो संतान की कुशलता व परिवार के कल्याण हेतु मनाया जाता है। यह बिहार, झारखंड व पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा लोक-पर्व माना जाता है, जो अब विश्वभर में प्रवासी भारतीयों द्वारा भी मनाया जाता है।
महत्व
छठ पूजा अपनी कठोरता के लिए जानी जाती है — व्रती (व्रत करने वाले) 36 घंटे से अधिक निर्जला उपवास रखते हैं और नदी अथवा तालाब के जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसे प्रकृति-पूजा व स्वच्छता के प्रति समर्पण का भी प्रतीक माना जाता है, क्योंकि घाटों की विशेष सफाई इस पर्व का अभिन्न हिस्सा है।
पूजा विधि
पहले दिन (नहाय-खाय) स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करें; दूसरे दिन (खरना) दिन भर उपवास के बाद गुड़ की खीर का प्रसाद ग्रहण करें; तीसरे दिन सायंकाल नदी/तालाब में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दें; चौथे दिन प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देकर 36 घंटे का व्रत पूर्ण करें।
मुहूर्त
संध्या व उषा अर्घ्य का सटीक समय सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर करता है, जो स्थान अनुसार भिन्न होता है — स्थानीय पंचांग से समय अवश्य जांच लें।
आज का पंचांग देखें →क्या करें व क्या न करें
✅ क्या करें
- • घाट व पूजा-स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
- • प्रसाद (ठेकुआ, फल) शुद्धता व सात्विकता के साथ तैयार करें
- • सूर्योदय व सूर्यास्त दोनों समय अर्घ्य अवश्य दें
❌ क्या न करें
- • व्रत के दौरान चमड़े की वस्तुओं का उपयोग न करें
- • पूजा सामग्री व प्रसाद में अशुद्धता न आने दें