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    29 जुलाई

    गुरु पूर्णिमा

    गुरु के प्रति कृतज्ञता व सम्मान अर्पित करने का पावन पर्व

    ⏳ 346 दिन शेष (2027)

    इतिहास

    गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है और महर्षि वेदव्यास के जन्म व उनके द्वारा वेदों के संकलन व महाभारत रचना की स्मृति में मनाई जाती है — इसीलिए इसे "व्यास पूर्णिमा" भी कहा जाता है। यह दिन प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा को सम्मान देने हेतु समर्पित है, जिसमें ज्ञान के हर स्रोत — आध्यात्मिक गुरु, शिक्षक व मार्गदर्शक — के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।

    महत्व

    भारतीय परंपरा में गुरु को ईश्वर के समान माना गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। यह दिन बौद्ध व जैन परंपराओं में भी अपने-अपने गुरुओं के सम्मान हेतु मनाया जाता है।

    पूजा विधि

    प्रातः स्नान कर अपने गुरु या आध्यात्मिक मार्गदर्शक का पूजन/स्मरण करें, उन्हें पुष्प व वस्त्र भेंट करें। जो शिष्य दूर हों, वे प्रार्थना व कृतज्ञता के माध्यम से भी अपना आदर व्यक्त कर सकते हैं।

    मुहूर्त

    पूर्णिमा तिथि के दौरान दिन भर पूजा शुभ मानी जाती है; सटीक तिथि हेतु पंचांग देखें।

    आज का पंचांग देखें →

    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • अपने गुरु/शिक्षक के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें
    • महर्षि वेदव्यास का स्मरण करें
    • आध्यात्मिक अध्ययन व सत्संग हेतु समय निकालें

    ❌ क्या न करें

    • गुरु या शिक्षकों के प्रति अनादर न दिखाएं

    FAQ

    इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों का संकलन किया व महाभारत की रचना की; उन्हें भारतीय परंपरा में आदि गुरु के रूप में सम्मानित किया जाता है।