2 अप्रैल
हनुमान जयंती
बल, बुद्धि व भक्ति के अवतार भगवान हनुमान का जन्मोत्सव
इतिहास
हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है (कुछ क्षेत्रों में कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी को भी मनाई जाती है)। यह पवनपुत्र हनुमान, माता अंजनी व केसरी के पुत्र, के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। हनुमान जी को भगवान राम के परम भक्त, अष्ट चिरंजीवियों में से एक व बल-बुद्धि-भक्ति के आदर्श स्वरूप माना जाता है।
महत्व
यह दिन भय, बाधाओं व नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति हेतु विशेष रूप से पूजनीय माना जाता है। मंदिरों में हनुमान चालीसा व सुंदरकांड के सामूहिक पाठ का आयोजन होता है।
पूजा विधि
प्रातः स्नान कर हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर व चोला अर्पित करें। हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ करें, और बूंदी या गुड़-चने का भोग अर्पित करें।
मुहूर्त
प्रातःकाल का समय पूजा हेतु विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि हनुमान जी का जन्म सूर्योदय के समय हुआ माना जाता है।
आज का पंचांग देखें →क्या करें व क्या न करें
✅ क्या करें
- • हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पाठ करें
- • मंदिर में सिंदूर व चोला अर्पित करें
- • जरूरतमंदों को भोजन व सहायता दान करें
❌ क्या न करें
- • इस दिन मांस-मदिरा से दूर रहें
- • क्रोध व नकारात्मक विचारों से बचें