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    14 अगस्त

    हरतालिका तीज

    माता पार्वती द्वारा शिव को पति रूप में पाने हेतु किए गए कठोर व्रत की स्मृति में मनाया जाने वाला पर्व

    ⏳ 362 दिन शेष (2027)

    इतिहास

    हरतालिका तीज भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। कथा के अनुसार देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने हेतु घोर तपस्या व निर्जला व्रत किया था, जिससे प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। इसी स्मृति में विवाहित व अविवाहित महिलाएँ अपने पति/भावी पति की दीर्घायु व सुखद वैवाहिक जीवन हेतु यह व्रत रखती हैं।

    महत्व

    इस व्रत को करवा चौथ से भी अधिक कठोर माना जाता है, क्योंकि इसमें संपूर्ण निर्जला उपवास (जल तक ग्रहण न करना) रखा जाता है। यह उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार व राजस्थान में व्यापक रूप से मनाया जाता है।

    पूजा विधि

    प्रातः स्नान कर श्रृंगार करें, रेत या मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर विधिवत पूजा करें। रात्रि भर जागरण कर भजन-कीर्तन करने की भी परंपरा है, और अगली सुबह व्रत का पारण किया जाता है।

    मुहूर्त

    तृतीया तिथि के दौरान पूजा का शुभ समय प्रातः या प्रदोष काल में होता है; सटीक समय हेतु पंचांग देखें।

    आज का पंचांग देखें →

    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर विधिवत पूजा करें
    • निर्जला व्रत को श्रद्धापूर्वक निभाएं (स्वास्थ्य अनुमति दे तो)
    • रात्रि जागरण व भजन-कीर्तन में सम्मिलित हों

    ❌ क्या न करें

    • स्वास्थ्य समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह के बिना निर्जला व्रत न रखें

    FAQ

    यह पूर्ण निर्जला व्रत है, जिसमें संपूर्ण दिन-रात जल व भोजन दोनों का त्याग किया जाता है — इसे हिंदू परंपरा के सबसे कठोर व्रतों में गिना जाता है।