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    17 अगस्त

    नाग पंचमी

    नाग देवताओं की पूजा व सर्प भय से सुरक्षा हेतु प्रार्थना का पर्व

    ⏳ 365 दिन शेष (2027)

    इतिहास

    नाग पंचमी श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है, जब नाग देवताओं — विशेषकर शेषनाग, वासुकि व तक्षक — की पूजा की जाती है। भारतीय संस्कृति में सर्पों को कृषि-रक्षक व पृथ्वी की उर्वरता से जुड़ा माना गया है, साथ ही भगवान शिव के गले में विराजमान नाग व भगवान विष्णु की शेषशैया भी इस पूजा से जुड़ी मान्यताएँ हैं।

    महत्व

    इस दिन सर्प-दंश के भय से रक्षा व काल सर्प दोष के निवारण हेतु विशेष पूजा की जाती है। कृषि प्रधान क्षेत्रों में इसे फसल-सुरक्षा से भी जोड़ा जाता है।

    पूजा विधि

    नाग देवता की मूर्ति या चित्र के समक्ष दूध, हल्दी व चावल अर्पित करें। जीवित सर्प को हानि पहुँचाने के बजाय प्रतीकात्मक पूजा (मिट्टी की नाग-प्रतिमा) करने की परंपरा अधिक उपयुक्त मानी जाती है।

    मुहूर्त

    पंचमी तिथि के दौरान प्रातःकाल पूजा शुभ मानी जाती है; सटीक समय हेतु पंचांग देखें।

    आज का पंचांग देखें →

    क्या करें व क्या न करें

    ✅ क्या करें

    • नाग देवता को दूध व हल्दी अर्पित करें
    • मिट्टी की नाग-प्रतिमा की प्रतीकात्मक पूजा करें

    ❌ क्या न करें

    • जीवित सर्पों को पकड़ना, कैद करना या हानि पहुँचाना वर्जित व अवैध है
    • इस दिन भूमि खोदने या हल चलाने से परहेज़ की परंपरा है

    FAQ

    नहीं, वन्यजीव संरक्षण कानूनों के अंतर्गत सर्पों को पकड़ना व प्रदर्शित करना अवैध है; मंदिरों में मूर्ति या चित्र के माध्यम से प्रतीकात्मक पूजा करना ही उचित व पारंपरिक रूप से स्वीकृत तरीका है।