17 अगस्त
नाग पंचमी
नाग देवताओं की पूजा व सर्प भय से सुरक्षा हेतु प्रार्थना का पर्व
इतिहास
नाग पंचमी श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है, जब नाग देवताओं — विशेषकर शेषनाग, वासुकि व तक्षक — की पूजा की जाती है। भारतीय संस्कृति में सर्पों को कृषि-रक्षक व पृथ्वी की उर्वरता से जुड़ा माना गया है, साथ ही भगवान शिव के गले में विराजमान नाग व भगवान विष्णु की शेषशैया भी इस पूजा से जुड़ी मान्यताएँ हैं।
महत्व
इस दिन सर्प-दंश के भय से रक्षा व काल सर्प दोष के निवारण हेतु विशेष पूजा की जाती है। कृषि प्रधान क्षेत्रों में इसे फसल-सुरक्षा से भी जोड़ा जाता है।
पूजा विधि
नाग देवता की मूर्ति या चित्र के समक्ष दूध, हल्दी व चावल अर्पित करें। जीवित सर्प को हानि पहुँचाने के बजाय प्रतीकात्मक पूजा (मिट्टी की नाग-प्रतिमा) करने की परंपरा अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
मुहूर्त
पंचमी तिथि के दौरान प्रातःकाल पूजा शुभ मानी जाती है; सटीक समय हेतु पंचांग देखें।
आज का पंचांग देखें →क्या करें व क्या न करें
✅ क्या करें
- • नाग देवता को दूध व हल्दी अर्पित करें
- • मिट्टी की नाग-प्रतिमा की प्रतीकात्मक पूजा करें
❌ क्या न करें
- • जीवित सर्पों को पकड़ना, कैद करना या हानि पहुँचाना वर्जित व अवैध है
- • इस दिन भूमि खोदने या हल चलाने से परहेज़ की परंपरा है