अर्थ
लक्ष्मी के बीज अक्षर "श्रीं" को दोहराना। इसमें कोई वाक्य नहीं, बस ध्वनि है।
परिचय
तंत्र और श्रीविद्या की परंपराओं में बीज अक्षरों का अलग से जप होता है। विचार यह है कि अर्थ पकड़ने की कोशिश छोड़कर मन सिर्फ़ ध्वनि पर टिके। यह थोड़ा अभ्यास माँगता है, इसलिए नए लोगों को आमतौर पर पहले पूरा मंत्र, ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः, जपने को कहा जाता है।
जप कैसे करें
शांत जगह, सीधी पीठ। उच्चारण सही होना ज़रूरी है, इसलिए किसी जानकार से सीख लें।
कब जपें: शुक्रवार, सुबह या शाम।
अभी जप शुरू करें
जप काउंटर इसी मंत्र के साथ खुलेगा और आपकी गिनती रखेगा।
लोग अक्सर पूछते हैं
एक अक्षर की वे ध्वनियाँ जिन्हें किसी देवता का सार माना जाता है, जैसे गणेश जी का "गं" और लक्ष्मी जी का "श्रीं"।